अत्यन्त दुःखद खबर है। जिन बच्चों पर हमारे देश का भविष्य टिका हुआ है उनकी जीवनलीला समाप्त हो रही है। बच्चों को अपने दिमागी साँचें में न ढालें, पैसे कमाने की मशीन बनाने की कुचेष्टा न करें, उन्हें वही बनने दें जो वे बनना चाहते हैं। नौकरी, काम-धंधा और पैसा यह सब कुछ जरूरी है लेकिन सर्वोपरि है - शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्। क्या डॉक्टरी और इंजीनियरिंग करने वाले ही जिन्दा हैं, इनके अलावा कुछ भी नहीं।
कोटा के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता, इसे वहाँ रहकर ही जाना जा सकता है। अभिभावकों को अब गंभीर होने की जरूरत है कि आखिर वे क्या चाहते हैं - पैसे कमाने की मशीन या अपनी सुन्दर, सुशील और सुखदायी संतति।
कुछ तो गड़बड़ है हवाओं में वरना साँसें यूं तो नहीं अटक सकती। कुछ तो है पानी की तासीर वरना लहरे यूँ ही नहीं थम सकती ये मशीनें बनाने के कारखाने क्या खुल गए जमाने भर में हर कारखाना तलाशता है इंसाँ नहीं, कोई टकसाल या एटीएम हाथ लग जाए॥ होनहार छात्र के प्रति दिली संवेदना प्रकट करता हूँ।
उम्मीदों एवं अाकांक्षाओं का बोझ कभी कभी अपार दुःख का कारण भी हो सकता है। अखबार में एक खबर पढ़ी एवं मन अत्यंत दुखी हो गया। धौलपुर जिले के एक होनहार छात्र का कोटा में निधन हो गया। धौलपुर का कोलारी निवासी शिवदत्त लोधी एक बहुत ही होनहार छात्र था, 10वीं एवं 12वीं में शिवदत्त ने धौलपुर जिले की मेरिट लिस्ट में स्थान भी हासिल किया था। पुलिस के अनुसार शिवदत्त ने सुसाइड का कारण अपने पिता की उम्मीदों को पूर्ण न कर पाना बताया, क्या कारण है कि एक मेधावी छात्र ने इस प्रकार का कदम उठाया।
हम सभी को यह सोचना ही होगा कि हम बच्चों के दिमाग पर उम्मीदों का बोझ इतना न डालें कि हमें भविष्य में ऐसे नतीजे भुगतने पड़ें। मैं पूरे धौलपुर की ओर से शिवदत्त को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ एवं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वे शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
