उन सभी इंजीनियर, कारीगरों को बंधाई जिन्होने इस पुल के निर्माण को संभव बनाया। समस्त देशवासियों को भी बंधाई। दो राज्यों – हिमांचल प्रदेश और पंजाब को सीधे जम्मू काश्मीर से जोड़ता है रावी नदी के ऊपर बनाया गया ये पुल। रछामंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा इस बिना खम्बे वाले पुल के उदघाटन के साथ इसको आम जनता के प्रयोग के लिए खोल दिया गया है। इस पुल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर “अटल सेतु” रक्खा गया है। रावी नदी पर बना यह पुल आम लोगों के साथ सीमाओं पर तैनात लाखों फौजियों के लिए काफी सामरिक महत्व का माना जा रहा है। ये अपने तरीके का भारत का चौथा केबल ब्रिज है, मुंबई का बांद्रा – वर्ली सी लिंक, इलाहाबाद का नैनी ब्रिज और कोलकाता का विद्यासागर सेतु दूसरे इस प्रकार के पुल हैं। जम्मू से करीब 200 किमी की दूरी पर बसोहली के पहाड़ी और प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर इलाके में 2011 में इस पुल के निर्माण का कारी आरम्भ हुआ था। यह पुल इंजीनियरिंग का शानदार नमूना है। पुल की कुल लंबाई 592 मीटर है तथा 13.50 मीटर चौड़ा है। पुल पर वाहनों के आवागमन के लिए 7.50 मीटर सड़क निर्मित की गई है व दोनों ओर 2-2 फुट फुटपाथ बनाया गया है। इसका डिजाइन आईआईटी दिल्ली के इंजीनियरों द्वारा तैयार किया गया तथा इसमें लगाई गई केबल को जापान, स्पेन से लाया गया है। इसको भारतीय(इंडियन) रेल्वे कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (IRCON) और SP सिंगला कंस्ट्रक्शन ग्रुप ने मिल कर बनाया है। पुल को बनाने में तकरीबन 200 करोड़ रुपये का खर्च आया है।
यह पुल जम्मू कश्मीर के बसोहली को पंजाब के दुनेहरा से जोड़ता है जिससे पठानकोट का रास्ता 100 किलोमीटर की बजाय अब 45 किलोमीटर का हो गया है। वहीं हिमांचल प्रदेश के डलहौसी की काश्मीर से दूरी को 45 किलोमीटर तक करता है जो पहले 180 किलोमीटर हुआ करती थी !! पुल के उदघाटन के अवसर पर रक्षामंत्री ने कहा कि इससे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल व पंजाब को फायदा होगा। पुल के उद्घाटन से पहले अपने संबोधन में रक्षामंत्री ने बनी-भद्रवाह सड़क का जल्द सर्वे करवाने की घोषणा करते हुए कहा कि सीमा सड़क संगठन जम्मू-कश्मीर में करीब दो दर्जन टनलों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सीमा सड़क संगठन टनल बनाकर यह सुनिश्चित करेगा कि बर्फबारी के कारण कट जाने वाले इलाकों को बारह महीने शेष देश से जोड़े रखा जाए। दो साल में रोहतांग, मनाली मार्ग भी तैयार हो जाएगा। रक्षामंत्री ने माना कि सिंथनटॉप में टनल बन जाने के बाद बसोहली-बनी-भद्रवाह-सिंथन टॉप-अनंतनाग सड़क डिफेंस रोड हो जाएगी। रक्षामंत्री ने कहा कि पहले प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए तय लक्ष्य प्रभावित होते थे, लेकिन अब संगठन के प्रोजेक्टों के लिए फंड की कोई कमी नहीं आएगी। सीमा सड़क संगठन अब सीधे तौर पर सेना के अधीन है। रक्षामंत्री ने कहा कि जल्द दिल्ली में बसोहली पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
भारत सरकार को भी बंधाई और धन्यवाद जो सरकार ने अविरत तत्परता के साथ पुल के निर्माण का कार्य सम्पन्न करवाने में सम्पूर्ण सहयोग दिया।
भारत सरकार को भी बंधाई और धन्यवाद जो सरकार ने अविरत तत्परता के साथ पुल के निर्माण का कार्य सम्पन्न करवाने में सम्पूर्ण सहयोग दिया।
