अप्राकृतिक तरीकों से सान्डो का विर्य निकालकर, उससे सीमेन डोज बनाये जाते हैं। फीर गाय जब heat पर आती है, तब उसके गर्भाशय में इसे inject किया जाता है और इस प्रक्रिया से गाय गर्भ धारण करती है। वैज्ञानिकों की भाषा में इस प्रक्रिया को "AI" यानि आर्टिफिसियल इन्सेमिनेसन (artificial insemination) कहते हैं।
निम्नलिखित कारणों से यह प्रक्रिया गोवशं की हत्या के लिये जिम्मेदार है :-
प्राकृतिक रूप से एक सान्ड अपने जीवनकाल में 1000 से 1200 बछड़े - बछड़ीयों का पीता बन सकता है। लेकीन semen manufacturing centers में unnatural तरीके से सान्डों का वीर्य स्खलन करवाकर, एक बार के वीर्य से 100 से 500 तक सीमेन डोज बनाये जाते हैं।
अगर हम average में 300 सीमेन डोज भी पकड़ें, तो एक सान्ड से करीबन 3 लाख सीमेन डोज बनाये जाते हैं और इन 3 लाख सीमेन डोज से 3 लाख गायों को गर्भ धारण करवाकर 3 लाख तक बछड़े - बछड़ी पैदा करवाये जा सकते हैं। यानि प्राकृतिक तरीके से एक सान्ड की छमता है 1000-1200 बछड़ीयों के पीता बनने की लेकीन सीमेन manufacturing के माध्यम से एक सान्ड को 3 लाख तक बछड़े - बछड़ी का पीता बनाया जाता है।
इसका मतलब यह निकलता है - अगर प्राकृतिक तरीके से गर्भ धारण करवाया जाता तो 3 लाख बछड़े - बछड़ीयों को जन्म करवाने के लिये कम से कम 300 सान्डों की जरूरत होती। लेकीन इस प्रक्रिया के कारण 300 सान्डो का काम, सिर्फ एक सान्ड के सीमेन्स से हो रहा है। तो बाकी 299 बछडों का कटने के अलावा रस्ता क्या है।
दूसरा रास्ता है - बछडों को बैल बनाने का ? लेकीन खेतों में ट्रेक्टर, केमीकल फर्टीलाईजर एवं पेस्टीसाईड का व्यवहार होने के कारण बैल का भी कोई उपयोग नहीं है।
यह प्रक्रीया unnatural होने के कारण, इसके side effects भी काफी हैं।
1. स्वाभाविक क्रिया न होने के कारण, गायों को satisfaction नहीं मीलता है।
2. 25% से ज्यादा गायों की प्रजनन शक्ति नहीं रहती है और गायें बान्झ हो जाती है।
3. अगर गायें बच्चे पैदा नहीं कर पायेगीं - तो दूध कहां से देगीं।
4. इस प्रक्रिया के कारण गोवशं की नस्लें भी बर्बाद हो रही हैं।
5. आज भारतवर्ष में देशी गायों के दूध का क्रमश: कमना और नस्लों की purity का बर्बाद होना - इस "AI" प्रक्रिया का ही नतीजा है
सभी गौरच्छक एवं गौभक्त भाईयों और बहनों से मेरा अनुरोध है की इस विषय पर गम्भीरता से सोचें तथा समझने का प्रयत्न करें और भारत सरकार तथा राज्य सरकारों पर सीमेनस मेन्युफ्केचरीगं सेन्टरस बन्द करने के लिये दबाव बनाएं।
क्योंकी भारतवर्ष में यह काम कोई भी प्राईवेट आदमी नहीं करता। चाहे वो हिन्दु हो या मुसलमान हो। यह काम - हमारे वोटों के द्वारा चुनी हुई, भारत सरकार एवं राज्य की सरकारें ही करती है।
मेरे हीसाब से हमारे देशी गोवशं की बर्बादी के लिये एवं फीर बर्बाद गोवशं को कत्लखाने पहुंचाने के लिये, "AI" के माध्यम से गायों को गर्भधारण करवाने वाली यह प्रक्रिया काफी हद तक जिम्मेदार है।
एक सचेतन नागरीक होने के नाते, हमारी यह जिम्मेदारी बनती है की हमलोग समाज में एक जागरूकता अभियान चलाएं एवं सरकारी स्तर पर इसका पुरजोर विरोध करें।
निम्नलिखित कारणों से यह प्रक्रिया गोवशं की हत्या के लिये जिम्मेदार है :-
प्राकृतिक रूप से एक सान्ड अपने जीवनकाल में 1000 से 1200 बछड़े - बछड़ीयों का पीता बन सकता है। लेकीन semen manufacturing centers में unnatural तरीके से सान्डों का वीर्य स्खलन करवाकर, एक बार के वीर्य से 100 से 500 तक सीमेन डोज बनाये जाते हैं।
अगर हम average में 300 सीमेन डोज भी पकड़ें, तो एक सान्ड से करीबन 3 लाख सीमेन डोज बनाये जाते हैं और इन 3 लाख सीमेन डोज से 3 लाख गायों को गर्भ धारण करवाकर 3 लाख तक बछड़े - बछड़ी पैदा करवाये जा सकते हैं। यानि प्राकृतिक तरीके से एक सान्ड की छमता है 1000-1200 बछड़ीयों के पीता बनने की लेकीन सीमेन manufacturing के माध्यम से एक सान्ड को 3 लाख तक बछड़े - बछड़ी का पीता बनाया जाता है।
इसका मतलब यह निकलता है - अगर प्राकृतिक तरीके से गर्भ धारण करवाया जाता तो 3 लाख बछड़े - बछड़ीयों को जन्म करवाने के लिये कम से कम 300 सान्डों की जरूरत होती। लेकीन इस प्रक्रिया के कारण 300 सान्डो का काम, सिर्फ एक सान्ड के सीमेन्स से हो रहा है। तो बाकी 299 बछडों का कटने के अलावा रस्ता क्या है।
दूसरा रास्ता है - बछडों को बैल बनाने का ? लेकीन खेतों में ट्रेक्टर, केमीकल फर्टीलाईजर एवं पेस्टीसाईड का व्यवहार होने के कारण बैल का भी कोई उपयोग नहीं है।
यह प्रक्रीया unnatural होने के कारण, इसके side effects भी काफी हैं।
1. स्वाभाविक क्रिया न होने के कारण, गायों को satisfaction नहीं मीलता है।
2. 25% से ज्यादा गायों की प्रजनन शक्ति नहीं रहती है और गायें बान्झ हो जाती है।
3. अगर गायें बच्चे पैदा नहीं कर पायेगीं - तो दूध कहां से देगीं।
4. इस प्रक्रिया के कारण गोवशं की नस्लें भी बर्बाद हो रही हैं।
5. आज भारतवर्ष में देशी गायों के दूध का क्रमश: कमना और नस्लों की purity का बर्बाद होना - इस "AI" प्रक्रिया का ही नतीजा है
सभी गौरच्छक एवं गौभक्त भाईयों और बहनों से मेरा अनुरोध है की इस विषय पर गम्भीरता से सोचें तथा समझने का प्रयत्न करें और भारत सरकार तथा राज्य सरकारों पर सीमेनस मेन्युफ्केचरीगं सेन्टरस बन्द करने के लिये दबाव बनाएं।
क्योंकी भारतवर्ष में यह काम कोई भी प्राईवेट आदमी नहीं करता। चाहे वो हिन्दु हो या मुसलमान हो। यह काम - हमारे वोटों के द्वारा चुनी हुई, भारत सरकार एवं राज्य की सरकारें ही करती है।
मेरे हीसाब से हमारे देशी गोवशं की बर्बादी के लिये एवं फीर बर्बाद गोवशं को कत्लखाने पहुंचाने के लिये, "AI" के माध्यम से गायों को गर्भधारण करवाने वाली यह प्रक्रिया काफी हद तक जिम्मेदार है।
एक सचेतन नागरीक होने के नाते, हमारी यह जिम्मेदारी बनती है की हमलोग समाज में एक जागरूकता अभियान चलाएं एवं सरकारी स्तर पर इसका पुरजोर विरोध करें।
(Vimal J. Soni)
