लेकिन आज जिस शख्स की बात हम कर रहे हैं उसका प्रेम अपनी माँ के लिए है! दुनिया में माँ का प्यार सबसे सच्चा और बिना किसी लालच के होता है!
इनसे मिलिए, ये हैं जलपाईगुड़ी (बंगाल) के करीम-उल-हक़! कुछ वर्ष पहले उनकी माँ को गंभीर बीमारी की अवस्था में अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल सकी थी। इलाज़ में देरी की वज़ह से उनकी माँ का देहांत हो गया। इस हादसे ने करीमुल को परेशान ज़रूर किया, लेकिन उसने हार नहीं मानी और अवसाद में जाने के बज़ाय उन्होंने ज़रूरतमंद लोगों को हर संभव मदद करने का रास्ता चुना।
तभी से करीम-उल-हक़ ने बीमारों के लिए मुफ्त एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया ताकि इलाज़ में देरी की वज़ह से उनकी तरह कोई और किसी अपने को न खो दे। साधन की कमी थी तो एंबुलेंस के रूप में उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल को ही विकसित कर लिया।
आज वे जलपाईगुड़ी के दुर्गम, दूरदराज़ के इलाकों में गरीबों के लिए मुफ्त मोटरसाईकल एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराते हैं। उनकी अथक, अनवरत कोशिशों से उस इलाके में अब तक बहुत सारी जिंदगियां बचाई जा सकी हैं।
मुस्लिम इशूज़ संवाददाता ने करीम उल हक़ से बात की तो उन्होंने बताया कि अब सारी ज़िन्दगी वो इसी तरह लोगों की सेवा करेंगे और बेसहारा लोगों की ज़िन्दगी बचाएंगे!
पीड़ित मानवता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध करीमुल जैसे नायकों के लिए हमारा एक सलाम तो बनता ही है!
