अधिकारियों और नेताओं के बच्चे सरकारी स्कूलों में जाएँ, अगर नहीं माने तो जुर्माना वसूला जावें - हाई कोर्ट

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     इलाहाबाद/उत्तर प्रदेश।। इलहाबाद हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक टिप्पणी में कहा है कि अधिकारियों, नेताओं और जजों के बच्चों को अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए ताकि सरकारी शिक्षा पद्धति में सुधार लाया जा सके.
    हाई कोर्ट ने खस्ताहाल प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए आदेश दिया कि निगम, अर्धसरकारी संस्थानों या अन्य कोई भी राज्य के खजाने से वेतन उठा रहा हो उनके बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ना अनिवार्य किया जाए.
     इतना ही नहीं कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जो कोई इसका पालन नहीं करता उससे फीस वसूली जाए और उनका प्रमोशन और इन्क्रीमेंट को रोक दिया जाए. कोर्ट ने मुख्य सचीव को आदेश देते हुए कहा कि इस सबंध में एक नीति बनायी जाए और छ महीने में अदालत को इस विषय मी सूचित किया जाए. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि अगले शैक्षणिक सत्र से इस व्यवस्था को लागू करना अनिवार्य है.
अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ते... इसलिए ऐसी दुर्दशा
    कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी, अफसर, मंत्री या नेता का बच्चा इन स्कूलों में नहीं पढ़ता इसलिए ऐसी दुर्दशा है. कोर्ट ने कहा कि अधिकारी वर्ग के बच्चों को जब तक सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिया बाध्य नहीं किया जाएगा तब तक उनकी दशा नहीं सुधरेगी. कोर्ट ने कहा कि अफसरों का इन स्कूलों से कोई भी लगाव नहीं है. जब उनके खुद के बच्चे इन स्कूलों में पढेंगे तो उनको समझ में आएगा कि यहां कौन-कौन सी मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है.
अगर प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया तो...
     कोर्ट ने सख्त आदेश दिया है कि कोई भी अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, मंत्री या नेता का बेटा अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता है तो उससे जुर्माना वसूला जाए. कोर्ट ने कहा कि अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में न पढ़ाने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान किया जाए. दोषी से हर महीने प्राइवेट स्कूल की फीस के बराबर पैसा उसके वेतन से काट लिया जाए और साथ ही उसका प्रमोशन और इन्क्रीमेंट भी रोक दिया जाए.
वोट बैंक के चलते सरकार यह नहीं देख रही शिक्षक योग्य है या नहीं
     हाई कोर्ट ने यूपी सरकार को शिक्षक मित्रों के सहायक टीच के रूप में समायोजित करने पर भी फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि सरकार का ध्यान कोर्ट की गुणवत्ता बढ़ाने की वजाय अपना वोट बैंक बढ़ाने पर ज्यादा है. इसलिए अयोग्य लोगों को भी नियम बदलकर शिक्षक बनाया जा रहा है. अपने समर्पित वोटर्स के लिए सिर्फ यह देखा जा रहा है कि वह अनपढ़ न हों.
हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी नहीं: शिक्षा मंत्री
     इलाहाबाद हाईकोर्ट का सरकारी स्कूल में सरकारी अफसरों और नेताओं के बच्चों को पढ़ाने के निर्देश पर मंत्री रामगोविंद चौधरी ने कहा कि मैं भी सरकारी स्कूल में पढ़ा हूं. सरकारी स्कूलों की स्थिति सही हो रही है. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी नहीं है. हालांकि उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति पूरी तरह सही नहीं हुई है.
   इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर पूर्व जज सीबी पांडेय ने कहा कि शिक्षकों को 40-40 हजार सैलरी मिल रही लेकिन सैलरी के अनुसार स्कूलों में पढ़ाई नही हो रही. उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी इस फैसले का स्वागत करें.
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