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अल्लाह ने हिन्दुओ को मारने का फतवा जारी किया हे - मुस्लिम मौलवी



    ध्यान दीजिये हिन्दू को मारने का फतवा है किसी बनिया या भंगी या SC या ST को मारने का फतवा नहीं जारी हुआ ।
     तारेक फतेह ने रविवार को एक वीडियो शेयर किया हैं जिसमे एक प्रमुख मुस्लिम धर्म गुरु और पूर्व बैंकर इरफ़ान उल हक पाकिस्तानियों को भड़का रहे हैं कि भारत में मूर्ति पूजकों ( हिन्दुओं ) को खत्म करो और हिन्दुओं को मार डालो .
   तारेक ने कहा है कि – “ 2011 के एक भाषण के दौरान मुस्लिम धर्म गुरु ने कहा कि धरती पर एक जगह है जहाँ इंसान पत्थर की मूर्तियों को पूजते हैं , ये भारतीय उपमहाद्वीप में हैं . “
    मुस्लिम धर्मगुरु ने आगे कहा है कि – “ पकिस्तानियों को अल्लाह का शुक्रगुजार होना चाहिए कि अल्लाह ने उन्हें भारत के खिलाफ जंग छेड़ने का फतवा जारी करते हुए सम्मान दिया है . “
    मुस्लिम धर्मगुरु ने कहा है कि – “ पैगम्बर ने साथ ही ये भी आदेश दिया है कि भारत में एक युद्ध होगा जो ‘ घज्वा ए हिन्द ‘ होगा . “
   मुस्लिम धर्मगुरु ने आगे फिर से कहा है कि – “ पाकिस्तान की नस्लों को ये आदेश मिला है कि वो पाकिस्तान के हाथों हिन्दुओं और भारत को हरा देंगे . “
इन मौलवी साहब के विचारों से कुछ इस तरह मेल खाता है इस्लाम दर्शन 
इस्लाम दर्शन भाग -------4
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आप कुरान और हदीसो को देखे अनेक जगह यह लिखा मिलेगा ऐ इमान वालो काफिरो (गैर-मुस्लिम )के दिलो मे खौफ और दहसत पैदा करो और उन्हे इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर करो ।जानवरो को तडपाकर कर मारना उसी का अंश है।एक मासूम बच्चे को घर मे पाले हुए जानवर को बच्चो के सामने बेरहमी से काटना जिससे उनके दिल मे क्रूरता निर्दयता पैदा हो जाय ताकि वह किसी इन्सान को भी जानवर की तरह काटने मे हिचके नही।अगर कही कोई जानवर काटा जा रहा हो तो 100 मे से 90 हिन्दू वहाॅ खडे भी नही हो सकते।
इसी क्रूरता को आइए कुरान मे पढते है
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इस्लामी जानवरियत :जानवर कौन है ?
जो लोग किसी हिंसक और क्रूर व्यक्ति को जानवर कह देते हैं ,वे इस लेख को ध्यान से पढ़ें और फैसला करें कि असली जानवर कौन हैं .हमारा विश्वास है कि सारे प्राणी ईश्वर की स्रष्टी हैं .उन्हें भी जीने का अधिकार है .कुरआन में जानवरों के बारे में यह लिखा है -
1 -जानवर अल्लाह ने बनाए हैं ,वे समझदार होते है .
"क्या इन लोगों ने नहीं देखा कि हमने चौपाये बनाए जिन्हें हमारे हाथों ने बनाया है "सूरा -यासीन 36 :71
कुरआन की सूरतों के नाम प्राणियों के नाम पर है ,जैसे बकरा =ऊंट ,नम्ल=चींटी .नह्ल=मधुमखी ,अनकबूत =मकडी और फील =हाथी .यानी अल्लाह को इनके बारे ने ज्ञान था .अल्लाह को ज्ञात था कि जीवों में बुद्धि भी होती है .
2 -जानवर बुद्धिमान होते है
"हमने हुदहुद से कहा कि यह पात्र लेजा और डाल दे ,देखें कि वह लोग पत्र पढ़कर पढ़कर क्या जवाब देते हैं ".सूरा -नम्ल 27 :28
"हमने जानवरों को जमीन से निकाला ,जो लोगों से बात करेंगे ,ताकि लोग हमारी आयातों पर यकीन करें .सुरा-अम्ल 27 :82
3 -जानवर मूर्ख और अचेतन हैं .
"अल्लाह की नजर में सारे जीव गूंगे और बहरे है ,जो भूमि पर चलते हैं .वे अचेतन है .सूरा -अन्फाल 8 :22
"क्या तुम समझते हो कि यह जानवर सुनते हैं ,और महसूस करते हैं ,यह तो बस निरे पशु हैं .सूरा-अल फुरकान 25 :44
4 -जानवर खाने की चीज हैं -
"तुम्हारे लिए चौपाये की जाती के सारे जानवर हलाल कर दिए गए,तुम उन्हें खाओ .सूरा -मायदा 5 :1
"जिस जानवर पर भी अल्लाह का नाम लियागया हो ,उसे खाजाओ .सूरा -अन आम 6 :119
5 -हलाल -हराम क्या है
"तुम्हारे लिए मुरदार ,सूअर का मांस ,खून और जिस जानवर पर अल्लाह के अलावा किसी और का नाम लिया गया हो ,वे सब हराम ठहराए गए हैं .फिर कोई मजबूर हो जाए ,और उसकी खुद इच्छा नहीं हो तो कोई गुनाह नहीं .सूरा -बकरा 2 173
"हे ईमान वालो ,जिन जानवरों के गले में पट्टे पड़ जाये वे सब कुर्बानी के जानवर हैं .सूरा -मायदा 5 :1
"तुम पर मुरदार ,रक्त ,सूअर का मांस ,और जो जानवर दम घुटने से मरे ,या ऊपर से गिर जाए ,या जसे किसी हिंसक जानवर ने घायल करदिया हो ,तो उसे ज़िंदा रहते ही फ़ौरन जिबह करदो और खा लो .सूरा -मायदा 5
"यदि तुम्हारे सधाए शिकारी जानवर किसी शिकार को पकड़ लें तो उसे पकडे रहो ,और अल्लाह का नाम लेकर खालो .सूरा मायदा 5 :4
6 -ऊंटों की कुरबानी का कारण
मुसलमान बकरों ,गायों ,और भेड़ों की कुरबानी को त्याग और बलिदान का प्रतीक बता कर असली बात छुपा देते है .वे बाइबिल कि चराई गयी एक कहानी बता देते है कि इब्राहीम ने अपने लडके का बलदान दिया था .लेकिन ऊंटों की कुरबानी का कारण लोगों को पता नहीं है .ऊंट की गर्दन नही काटी जाती है .उसे खड़ा करके उसकी गर्दन में भालेसे छेद कर दिया जाता है .जब वह खून बहाने से गिर जाता है तो उसे जिन्दा ही काट कर खा लिया जाता है .इस विधि को "नहरनहर कहा जता है.
ऊंट की कुर्बानी यानी नहर करने का तरीका काफी क्रूर और ह्रदयविदारक होता है .पहिले ऊंट को खडा कर के उसके गले में तेजदार हथियार से उसके गले की धमनी में छेड़ कर दिया जाता है .जब ऊंट खून बह जाने से कमजोर होकर नीचे गिर जता है ,तो उसे ज़िंदा रहते ही टुकड़ों में काट लिया जाता है .और खा लिया जाता है .मुहम्मद ने यह तरीका लोगों को डराने ,और इस्लाम की धाक जमाने के लिए बनाया था .देखिये -
"यह नजारा देख कर काफिरों के दिल थर्रा जायेंगे ,और वह कांप कर अलह को याद करेंगे "सूरा -अल हज 22 :35
फिर मुहम्मद ने तरीका भी बता दिया कि ऊंट की कुरबानी कैसे करें -
"हमने ऊंटों की कुरबानी के लिए यह तरीका ठहराया है कि ,पाहिले ऊंट खानेवाले (ऊंट कटाने तक )धीरज से बैठे रहें .फिर ऊंटों को अल्लाह का नाम लेकर एक पंक्ति में खडा कर दिया जाए .और अल्लाह का नाम लेकर नहर किया जाये .जब ऊंट जमीन पर किसी पहलू पर गिर जाएँ ,तो उन्हें कट कर खाओ और बैठे हुए लोगों को भी खिलाओ .यदि कुछ बचा रहे तो ,माँगने वालों को बाँट दो .इस तरह से हमने ऊंट को तुम्हारे काम में निपटाने का तरिका बता दिया.सूर -अल हज्ज 22 :36
7 -जानवरों के बारे में इस्लाम के विचार -
"जानवरों का खून अल्लाह को प्यारा है .इब्ने माजा -किताब 4 हदीस 3126
"जब जानवरों को मारो तो उनके खून में चप्पल डूबा लो .इब्ने माजा -किताब 4 हदीस 3105 और 3106
"जानवरों को मारते समय चाकू छुपा लो .इब्ने माजा -कित्ताब 4 हदीस 3172
"हर साल कुरबानी करना जरूरी है .इब्ने माजा -किताब 4 हदीस 3125
"कुर्बानी के जानवर को माला पहिनाओ .इब्ने माजा किताब 4 हदीस 3096
"जिबह से पहिले जानवर को खूब सताओ .इब्ने मजा -किताब 4 हदीस 3097
"कुर्बानी से पूर्व ऊंट की सवारी कर लो .इब्ने मजा -किताब 4 हदीस ३१०३और 3104
"अगर ऊंटनी गर्भिणी हो और नहर के समय उसका बच्चा गिर जाये ,तो मान के साथ के साथ खाओ पर यह औरतो के लिए जायज नही।