मुस्लिम धर्मगुरू और हिन्दू धर्मगुरू में यह है अन्तर !! इसलिए हिन्दू हमेशा ठंडे रहते है

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1.  मुसलमानों के धर्मगुरु सबसे मिलते हैं. चाहे वह गरीब हो या अमीर। यदि वह अमीर है तो उससे पैसे का प्रबन्ध करने के लिए पैसा देने को कहते हैं यदि वह गरीब है तो उसे पैसा देकर कुछ भी करवाने के लिए तैयार कर देते हैं।
   हिन्दू धर्मगुरु पैसेवाले का सम्मान करता है धन पाने के लिए। और गरीब से तो मिलता भी नहीं है उसे गेट पर से ही वापस कर दिया जाता है जैसे वह इंसान ही नही है। ये अंतर है दोनो मे।
2. मुस्लिम धर्म गुरु उनके साथ चलता है, हिन्दू धर्म गुरु गाड़ी से चलता है।
3. मुस्लिम धर्म गुरु उन्हें शिक्षा देते हैं धर्म के लिए मर जाना ठीक है पर अपमान नही सहना। हिन्दू धर्म गुरु कोई क्या कहता है इससे मतलब मत रखो बस भजन करो भगवान सब सही करेगा।
4. मुस्लिम धर्म गुरु खुद अस्त्र लेकर निकलता है आगे आगे चलता है पर हिन्दू धर्म गुरु यदि कोई अस्त्र लेकर निकला तो उसे भी वापस बुलाने आ जाते हैं अरे बेटा कानून को अपने हाथ मे मत लो हिंसा से दूर रहो ईश्वर तुम्हे दण्ड देगा.. भारत का कानून कैसे काम करता है ये तो सबको पता है।
5. हिन्दू धर्म गुरु प्रतीक्षा करता है किसी ऐसे व्यक्ति का जो दुष्ट को सबक सिखाए. मुस्लिम धर्म गुरु क्या सिखाता है देखो यदि अकेले जाकर किसी को मारोगे तो स्वयं पर भी खतरा है और कानूनी कार्यवाही और सजा भी हो सकती है लेकिन यदि 50 या 100 या 1000 से ऊपर की भीड़ लेकर जाओगे तो सुरक्षा भी होगी और कानूनी कार्यवाही भी किसी पर नही होगी. क्योंकि इतने लोगों मे से किसने किया ये साबित करना बहुत ही मुश्किल है।
6. मुस्लिम धर्म गुरु जहाँ अपने धर्म को हमेशा बढाने के लिए प्रयास मे लगे रहते हैं वही हिन्दू धर्म गुरु अपनी भोगविलास की जरूरतों को पूरा करने मे ही व्यस्त रहता है। कुछेक अपवादों (कुछ हिन्दू धर्मगुरू जो सच में धर्म रक्षा के कार्य में लगे है) को छोडकर।
7. मुस्लिम धर्म गुरु जहाँ अपने धर्म के गरीब लोगों की सहायता करते हैं वहीं हिन्दू धर्म गुरु गरीब लोगों से भी धन प्राप्त करने के प्रयास मे लगे रहते हैं । बस पैसे कैसे आयें दिनरात इसी प्रयास मे लगे रहते हैं पैसे लेकर के लोगों का शोषण करते हैं .
8. मुस्लिम धर्म गुरु को जहाँ कुरान याद रहती है वही हिन्दू धर्म गुरु को गीता वेद रामायण का एक भी अध्याय याद नही होता व्याकरण के 10 सूत्र भी याद नही होते ।
9. मस्जिद का जहाँ धर्मशिक्षा और आगे की रणनीति बनाने के लिए प्रयोग होताहै. वहीं मन्दिर व्यापार स्थल मे परिवर्तित होते जा रहे हैं इससे लोगों की हिन्दू धर्म मे आस्था कम होती जा रही है.
10. हिन्दू धर्म गुरु बाते बहुत करते हैं पर काम कुछ नही करते वही मुस्लिम धर्म गुरु बातें और काम दोनों करते हैं।। और भी बाते हैं मैने कुछ कारणों को ही गिनाया है और आप लोग भी जानते होंगे।। इन का क्या उपाय है हिन्दू धर्मचिन्तक चिन्तन करें।
सदियों पुरानी मुस्लिम रणनीती का नया रूप
    तब वे मूर्तियाँ तोडते थे, आज पुलिस स्टेशन जलाते हैं। तब हिंदू मूर्ती में अपना संरक्षक देखता था इसलिये मूर्ती तोडी जाती थी कि देखो, हम ने आपके रक्षणकर्ता का क्या हाल बना दिया, वो आपको हम से बचा नहीं सकता, हम से डरो।
    आज इसी लॉजिक के तहत पुलिस स्टेशन तोडे-जलाए जा रहे हैं। हमें यह दिखाने की कोशिश हैं कि ये रहे तुम्हारे बचानेवाले, हम से बच के भाग निकल रहे हैं। यह नहीं बताते कि हिन्दू विरोधी राजनेता जो राज्य की सरकार चला रहे हैं, भीड़ जमा होने की जानकारी होते हुए भी वहाँ पर्याप्त पुलिस बल या RAF को नहीं भेज रहे हैं और उग्र भीड़ पर फ़ाइरिंग का हुक्म नहीं दे रहे हैं।
    अफजल खाँ ने तुलजाभवानी की मूर्ती तोडी, शिवाजी महाराज उस वक्त खून का घूँट पी कर रह गये। लेकिन वक्त आनेपर उन्होने उसी अफजल खाँ का सर काट कर तुलजभवानी के चरणोंमे रख दिया।
    महापुरुषों से हमें सीख लेनी चाहिए। मुसलमान उनके रसूल का अनुकरण करते हैं। "Quranic Concepts Of War या उसका हिन्दी अनुवाद - कुरान में युद्ध की अवधारणाएँ" अवश्य पढ़िये, बात समझ में आ जाएगी। 


(Vimal J. Soni)
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