



वैशाली के जंदाहा में एक ऐसा गांव है जहां बेटी की डोली उठने में पानी बाधा बनकर खड़ा हो जाता है.सदियों से सुनते आ रहे है पानी ही जीवन है, यह सत्य भी है. मगर वैशाली के जंदाहा, सहदेई, देसरी व महनार प्रखंड के लगभग 45 गाँव में गरीब परिवार की लड़कियों की शादी में बाधा का काम कर रहा है. अमृत के रूप में जाना जाने वाला यही पानी जहर का काम कर रहा है.
यहां पर आज ये लोग अपनी बच्चियों की शादी करने के लिए किसी दूसरे गाँव जाते हैं तो वहाँ के लोग साफतौर पर उन्हें मना कर दिया जाता हैं.
ऐसा ही एक उदाहरण है जंदाहा प्रखंड के भाथ गांव की एक लड़की का, जो इस जहर को पीने के बाद कुरूप हो गई है. उसका नाम इसके माता-पिता ने काल्पनिक नाम ममता रखा है. वो जब पैदा हुई होगी तो इनके माता-पिता ने एक सपना अपने मन में संजोया होगा कि बड़ी होने पर वे अपनी बेटी की शादी बड़ी ही धूमधाम से करेंगे.
लेकिन समय ने ऐसी करवट ली कि आज इनकी बच्ची की शादी रुक गई है. लड़के वाले यह कहते हैं कि आपकी बच्ची को छुआछुत की बीमारी है.
अब ममता इंतजार में है कि कोई अभिशाप बने इस आर्सेनिक युक्त पानी से छुटकारा दिला दे क्योंकि ममता भी आर्सेनिक युक्त पानी पीने से चर्म रोग से पीड़ित हैं.
बहरहाल देखना है कि क्या ममता की भी शादी हो पायेगी या नहीं?...बस सुनते हैं दुखड़ा
जंदाहा प्रखंड के कई गाँव के लोगों ने साफ तौर पर कहा कि हम लोग तो आज मजाक बन कर रह गए हैं. कई लोग आते हैं हमारा दुखड़ा सुनते हैं और चले जाते हैं, लेकिन आज तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया.
जब मैने इस समस्या को टी.वी पर दिखाने की बात कही तो इन लोगों ने कहा कि आप लोगों से पहले भी कई लोग यहाँ पटना से लेकर दिल्ली तक के आये और आश्वासन देकर चले गए कि सरकार तक इस बात को पहुचाएंगे, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ. आप लोग भी जाकर भूल जायेंगे.
महनार सहदेई देसरी व जंदाहा प्रखंड क्षेत्र मे आज लगभग दो अर्से से आर्सेनिक की गंभीर समस्या से झूझ रहा है. कई गंभीर मामले भी सामने आये.
महनार के पहाड़पुर विशुनपुर मे तो एक ही परिवार के 7 बच्चे भी जन्मांध पैदा होने लगे पर इन सारे संशयों से गंभीर समस्या आज यहाँ के लोगों के सामने यह है कि इनकी बच्चियों की शादी में भी अब बाधा आने लगी है.
छुआछुत की बीमारी मानता है समाज
आर्सेनिक युक्त पानी पीने की वजह से जिन बच्चियों में चर्म रोग की समस्या है उनकी शादी आज रुक गई है. समाज इन्हें छुआछुत की बीमारी मान कर अपनाने से इंकार कर रहा है.
सरकार कहाँ सोई है, क्या दूषित पानी की वजह से सहदेई जंदाहा देसरी की बच्चियों की शादी रुक जाएगी? क्या महनार , सहदेई , देसरी , जंदाहा के गरिब परिवार की बच्चियां अब कुंवारी ही रहने को विवश हो जाएँगी? इस गंभीर समस्या से उबरने के लिए हमें सोचना ही पड़ेगा.
