इस मंदिर में पिछले 16 सालों से रोज नाग आकर के करता है भगवान शिव की पूजा

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      भगवान शिव को नाग बहुत प्रिय हैं, और पुराणों में उनके गले में नाग को लिपटा हुआ दिखाया जाता है। भगवान शिव के वेसे तो भारत और विश्व में बहुत मंदिर हैं जहां रोज लोग पूजा करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी करते हैं, पर एक मंदिर बहुत विचित्र है, इस अनोखे मंदिर में पिछले 16 सालों से लगातार एक नाग भगवान शिव की खास पूजा करने आता है।
     उत्तरप्रदेश के आगरा के पास स्थित एक गांव है – सलेमाबाद। गांव में एक प्राचीन शिव मंदिर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पिछले करीब 16 वर्षों से एक नाग रोज आकर भगवान शिव को नमन करता है।
     इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु शिवजी की पूजा करने आते हैं लेकिन नाग का इस तरह आना जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। यह नाग रोज मंदिर में आता है और करीब 5 घंटे तक यहां रुकता है।
     नाग सुबह 10 बजे आता है और शाम को 3 बजे वापस लौट जाता है। इस अवधि में यह शिवलिंग के पास ही बैठा रहता है। यहां आसपास के गांवों में भी इस नाग की चर्चा है। इससे श्रद्धालुओं को कोई भय नहीं है और न इसने कभी किसी को नुकसान पहुंचाया।
     हालांकि नाग के मंदिर में प्रवेश करने के बाद मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान कोई और व्यक्ति मंदिर में प्रवेश नहीं करता। 3 बजने के बाद नाग वहां से चला जाता है।
     उसके बाद ही लोग मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने जाते हैं। किसी सर्प का इतनी लंबी अवधि से रोज मंदिर में आकर शिवलिंग के पास रुकने को यहां के लोग आश्चर्य से ज्यादा श्रद्धा का विषय मानते हैं।      पुराणों की मानें तो एक तथ्य यह भी हो सकता है कि शायद यह नाग कोई दिव्य आत्मा हो जिसे कोई श्राप मिला हुआ हो, कहना असंभव है पर संभावना और पुर्व काल की कथाऐं तो यहीं बताती हैं कि क्योंकि कोई साधारण नाग इस प्रकार भगवान शिव की पूजा करता हो ऐसा देखने में नहीं मिलता है। पुराणों में कथा है कि एक राजा गिरगिट बनाये गये थे, तो काकभुसंणी जी को तौ कौआ बनाया गया था। खुद भरत एक बार हिरण बने थे, तो कहा जा सकता है कि यह भी कोई दिव्य आत्मा ही होंगे जो नाग के रूप में भी मानवों की तरह भगवान का सानिध्य प्राप्त कर रहे हैं।


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