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ये सांसद आज भी पंचर बनाने रोड पर बैठ जाते हैं

बच्चों को पंचर बनाने के टिप्स देते सासंद वीरेन्द्र खटीक।
     भोपाल। पीएम मोदी के चाय बेचने से पीएम बनने तक के संघर्षों की कहानी सब को पता है। पीएम मोदी के अलावा भाजपा में कई ऐसे नेता हैं जिनका बचपन संघर्षों के दौर से गुजरा है। आज हम भाजपा के एक ऐसे सांसद के बारे में आपको बताते हैं जिन्होंने बचपन से लेकर अपनी कॉलेज की पढ़ाई बड़े संघर्ष के साथ की।
       10 साल तक पंचर बनाने और साइकल रिपेयर कर अपना जीवनयापन करने वाले भाजपा सांसद वीरेन्द्र खटीक आज मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले से सांसद हैं। वीरेन्द्र खटीक छठवीं बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे और सादे जीवन के लिए जाने जाते हैं। आज भी अपने पुराने स्कूटर पर सवार होकर जनता के सुख-दु:ख में हिस्सा लेने वाले सांसद वीरेन्द्र खटीक अपने सरल और सहज स्वभाव के लिए काफी चर्चित हैं। इसके अलावा जनता की समस्याओं के लिए जनता की चौपाल लगाने का प्रयोग सांसद वीरेन्द्र खटीक का काफी लोकप्रिय हुआ था और आज मध्यप्रदेश सरकार अपने दफ्तरों में इसी तरह की जनसुनवाई हर हफ्ते करती है।
बचपन से लेकर जवानी तक सुधारी साइकल और पंचर
     'ईनाडु इंडिया' से बातचीत में वीरेन्द्र खटीक ने बताया कि उनका बचपन संघर्ष के दौर से गुजरा है। उनके पिता अमर सिंह आरएसएस के सदस्य थे। काफी स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्होंने अपने जीवन यापन के लिए सागर शहर के गौरमूर्ति पर एक साइकल रिपेयरिंग की दुकान खोली थी। साइकल की दुकान के जरिए पूरे परिवार का भरण-पोषण होता था। हम सभी भाई-बहन की पढ़ाई का खर्चा भी उससे चलता था।
     वीरेन्द्र खटीक जब पांचवीं कक्षा में पढ़ते थे, तो उन्होंने पिताजी की साइकिल की दुकान पर बैठना शुरू कर दिया था। शुरुआत में तो वीरेन्द्र अपने पिता की कामकाज में मदद करते थे। लेकिन, धीरे-धीरे उन्होंने अपने पिता से साइकल रिपेयरिंग का सारा कामकाज सीख लिया और फिर खुद दुकान की जिम्मेदारी संभाल ली।
      पांचवी से लेकर सागर विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने साइकिल रिपेयरिंग का काम किया। वीरेन्द्र बताते है कि दुकान पर शुरुआत में वो लापरवाही से काम करते थे। क्योंकि उनके दोस्त जब खेल रहे होते थे तो उन्हें दुकान पर बैठना होता था जो उन्हें पसंद नहीं था। कई बार दुकान में पंचर सुधारने के दौरान पिता की डांट का सामना भी उनको करना पड़ता था।
     वीरेन्द्र बताते है कि पंचर सुधारने के काम को में ध्यान से नहीं करता था तो पिताजी मुझे अच्छी तरह से पंचर बनाना सिखाते थे। धीरे-धीरे पंचर बनाने से लेकर रिपेयरिंग के सारे काम उन्हें आने लगे तो फिर उन्होंने दुकान की जिम्मेदारी संभाल ली। सांसद वीरेन्द्र खटीक जब भी आज किसी किशोर या नवयुक को पंचर बनाते या साइकिल सुधारते हुए देखते हैं तो उसको पंचर और साइकिल रिपेयरिंग के टिप्स देते हैं। सांसद होते हुए भी वीरेन्द्र सड़क पर बैठकर साइकिल रिपेयरिंग का काम सिखाने लगते हैं।
सालों पुराना स्कूटर सांसद की पहचान
      सांसद वीरेन्द्र खटीक की एक और पहचान है। उनका सालों पुराना स्कूटर। वीरेन्द्र खटीक जब सागर सांसद थे तो अपने पुराने स्कूटर से घूमा करते थे। उनकी यही सादगी उनकी पहचान बन गयी है। वीरेन्द्र सागर सांसद रहे हो या फिर मौजूदा टीकमगढ सांसद उनका स्कूटर उनके साथ रहता है और ज्यादातर स्थानीय कार्यक्रमों में वो स्कूटर से ही पहुंचते हैं न कि लग्जरी गाड़ियों में।
जन-समस्याओं के लिए की अनोखी पहल
     वीरेन्द्र खटीक जब सागर सांसद चुने गए तो संसदीय क्षेत्र बढ़ा होने के कारण वो पूरे क्षेत्र का दौरा नियमित नहीं कर पाते थे। ऐसे में जनसमस्याओं के निराकरण के लिए उन्होंने एक पहल की और सागर जिला मुख्यालय पर हर सोमवार को जनसमस्या शिविर लगाने की शुरुआत की।
    इस शिविर में संसदीय क्षेत्र के परेशान लोग पहुंचते थे और अपनी समस्या सांसद को बताते थे। सांसद पहल कर नागरिकों की समस्या सुलझाते थे। धीरे-धीरे करके उनका तरीका काफी लोकप्रिय हुआ और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी उनसे प्रेरणा लेकर जनसमस्याओं को सुलझाने की पहल की।
लगातार छह बार पहुंचे लोकसभा
    जहां तक सादा जीवन उच्च विचार वाले सांसद वीरेन्द्र खटीक 1996 से लेकर लगातार 2004 तक सागर के सांसद चुने गए। 2009 और 2014 में वीरेन्द्र खटीक ने टीकमगढ से चुनाव लड़ा और टीकमगढ़ से भी लोकसभा चुनाव जीते।