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हाईकोर्ट ने पूछा, ज्यादा फीस तो नहीं ले रहे शिक्षण संस्थान

       शिमला।। हाईकोर्ट ने निजी शिक्षण संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं और मान्यता की जांच के लिए कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वे कमेटी गठित करें जो हर स्तर के निजी शिक्षण संस्थान जैसे स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, किसी भी नाम से चलने वाले एक्सटेंशन सेंटर और विश्वविद्यालय की जांच तीन माह के भीतर पूरी करेंगे। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि कमेटी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। इसमें ये स्पष्ट किया गया जाए कि क्या निजी संस्थान के पास पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षित स्टाफ, अध्यापक-अभिभावक संघ आदि हैं।
संस्थानों की 11 जानकारी वेबसाइट पर डालें
      हाईकोर्ट ने प्रधान शिक्षा सचिव को आदेश दिए हैं कि वे निजी संस्थानों से जुड़ी कम से कम 11 जानकारियां अपनी वेबसाइट और संस्थान के मुख्य द्वार पर लगाएं। इन जानकारियों में वो बताए कि उनके संस्थान में फैकल्टी सदस्यों की योग्यता एवं काम का अनुभव, इंफ्रास्ट्रक्चर का विवरण, मान्यता प्रमाण पत्र, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट का विवरण, फीस का संपूर्ण विवरण अन्य गैर शैक्षणिक गतिविधियों की संपूर्ण जानकारी, अध्यापक अभिभावक संघ की पूर्ण जानकारी, परिवहन सुविधाओं की विस्तृत जानकारी, संस्थान की आयु व उपलब्धियां, छात्रवृत्तियों की जानकारी और पूर्व छात्रों का पता फोन नंबर समेत सूची में शामिल हो।
ज्यादा हो रही फीस वसूली
     बिजनेस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडी की याचिकाओं को निपटाते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश में धड़ल्ले से चल रहे निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर आपत्ति प्रकट करते हुए कहा कि निजी संस्थान नाजायज ढंग से फीस वसूल कर अपने संसाधन बढ़ा रहे हैं। शिक्षा का स्तर गिराते हुए इसे व्यवसायिक बना दिया गया। हर संस्थान की जवाबदेही है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
फीस लौटाने के आदेश
     कोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए प्रार्थी निजी शिक्षण संस्थान को 10 हजार की कॉस्ट भी लगाई। रेगुलेटरी कमीशन विवि ने बिजनेस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडी को उन छात्रों की फीस लौटने के आदेश दिए जो संस्थान से एमबीए और पीजीडीएम कोर्स कर रहे थे। इन छात्रों ने आरोप लगाया था कि संस्थान की ओर से वसूली जा रही फीस हद से ज्यादा है। ये कोर्स मान्यता प्राप्त भी नहीं है।