देश विरोधी नारेबाजी को लेकर जेनएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार जब जेल गया तो उसे सिर्फ इसलिए हीरो बनाया गया क्योकि उसने देश को टुकड़े टुकड़े करके और भारत की बर्बादी की कामना की थी ... बेहद गरीब घर से ताल्लुक रखने वाला कन्हैया कुमार एक वक्त ट्रेन में धक्के खाता हुआ दिल्ली पहुंचा था लेकिन आज लगातार हवाई यात्रा कर रहा है वो भी बिजनस क्लास में ..
अब सवाल यह है कि कन्हैया कुमार के कार्यक्रमों और उसके हवाई यात्राओं का खर्च कौन उठा रहा है ?? जानकारों की मानें तो कुछ राजनीतिक पार्टियां कन्हैया कुमार का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही हैं और वो ही उसके सभी आयोजनों और हवाई यात्राओं का खर्च वहन कर रही हैं। क्योकि कन्हैया कुमार अपने भाषणों में सिर्फ बीजेपी, मोदी और संघ पर ही तीखे हमले करता है ... यही नही एक सवाल के जबाब में उसने दिल्ली में सिख्खो के नरसंहार को जायज बता दिया था |
आपको बता दें कि खुद को गरीब कहने और गरीबी से आजादी मांगने वाले कन्हैया कुमार जब जेल से वापस जेएनयू आया था तो फार्च्यूनर गाड़ी में था। कन्हैया कुमार का कहना है कि वो बेहद गरीब परिवार से है। उसके पिता को पैरालाइज्ड है और मां 3000 रुपये कमाती है और उसी में पूरा परिवार गुजारा करता है। लेकिन जब कन्हैया तिहाड़ जेल से वापस आया तो उसने ब्रांडेड कंपनी पूमा के कपडे, जैकेट और जूते पहने थे। बात अगर पूमा कंपनी के टीशर्ट की करें तो वो 15 सौ रुपये से ऊपर आती हैं। जूते 3000 हजार से ऊपर मिलते हैं और जैकेट 5000 हजार से भी अधिक दाम में मिलती है।
कन्हैया कुमार को चाहें हैदराबाद जाना हो या फिर नागपुर, वो हवाई जहाज से सफर कर रहा है। उसके इन खर्चों को कौन वहन कर रहा है? 3000 रुपये में गुजरा करने वाले माँ बाप की संतान कन्हैया कुमार के पास इतना पैसा कहाँ से आ गया की वो लग्जरी गाडी में घूम रहा है और ब्रांडेड कंपनी के कपडे पहन रहा है? कन्हैया जब जेल में था तो उसने महंगे वकीलों की फौज खड़ी कर दी थी। किसने दिया उन वकीलों का शुल्क?
अब सवाल यह है कि कन्हैया कुमार के कार्यक्रमों और उसके हवाई यात्राओं का खर्च कौन उठा रहा है ?? जानकारों की मानें तो कुछ राजनीतिक पार्टियां कन्हैया कुमार का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही हैं और वो ही उसके सभी आयोजनों और हवाई यात्राओं का खर्च वहन कर रही हैं। क्योकि कन्हैया कुमार अपने भाषणों में सिर्फ बीजेपी, मोदी और संघ पर ही तीखे हमले करता है ... यही नही एक सवाल के जबाब में उसने दिल्ली में सिख्खो के नरसंहार को जायज बता दिया था |
आपको बता दें कि खुद को गरीब कहने और गरीबी से आजादी मांगने वाले कन्हैया कुमार जब जेल से वापस जेएनयू आया था तो फार्च्यूनर गाड़ी में था। कन्हैया कुमार का कहना है कि वो बेहद गरीब परिवार से है। उसके पिता को पैरालाइज्ड है और मां 3000 रुपये कमाती है और उसी में पूरा परिवार गुजारा करता है। लेकिन जब कन्हैया तिहाड़ जेल से वापस आया तो उसने ब्रांडेड कंपनी पूमा के कपडे, जैकेट और जूते पहने थे। बात अगर पूमा कंपनी के टीशर्ट की करें तो वो 15 सौ रुपये से ऊपर आती हैं। जूते 3000 हजार से ऊपर मिलते हैं और जैकेट 5000 हजार से भी अधिक दाम में मिलती है।
कन्हैया कुमार को चाहें हैदराबाद जाना हो या फिर नागपुर, वो हवाई जहाज से सफर कर रहा है। उसके इन खर्चों को कौन वहन कर रहा है? 3000 रुपये में गुजरा करने वाले माँ बाप की संतान कन्हैया कुमार के पास इतना पैसा कहाँ से आ गया की वो लग्जरी गाडी में घूम रहा है और ब्रांडेड कंपनी के कपडे पहन रहा है? कन्हैया जब जेल में था तो उसने महंगे वकीलों की फौज खड़ी कर दी थी। किसने दिया उन वकीलों का शुल्क?
