यहां के निवासी जमीन के अंदर बने घरों में रहते हैं
दरअसल दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में एक छोटा-सा गांव हैं ‘कूबर पेड़ी’. इस जगह की खासियत यह है कि यहां के लोग अंडरग्राउंड घरों में रहते हैं. यहां ओपल की कई खदानें हैं. लोग यहां इन्हीं ओपल की खाली खदानों में रहते हैं. बाहर से देखने पर यह घर साधारण नज़र आते हैं, पर इनके अंदर जाने पर पता चलता है कि ये किसी होटल से कम नहीं हैं.
कूबर पेड़ी एक रेतीला स्थान है
यहां पर माइनिंग का काम 1915 में शुरू हुआ था. कूबर पेड़ी एक डेज़र्ट एरिया है, इसलिए यहां पर गर्मियों में तापमान बहुत ज्यादा और सर्दियों में बहुत कम हो जाता है. इस वजह से यहां रहने वाले लोगों को बहुत तकलीफ़ को सामना करना पड़ता था. इसका यह हल निकाला गया कि लोगों को माइनिंग के बाद खाली बची खदानों में शिफ्ट कर दिया जाए.
ओपल की कई खदानें
ओपल एक दूधिया रंग का कीमती स्टोन होता है. कूबर पेड़ी ‘Opal capital of the world’ कहलाती है. क्योंकि यहां पर विश्व की सबसे ज्यादा ओपल माइंस हैं.
ए.सी. की ज़रूरत नहीं पड़ती कूबर पेड़ी रेतीला स्थान है, लेकिन इन अंडरग्राउंड घरों में न तो गर्मियों में ए.सी. की ज़रूरत पड़ती है और न ही सर्दियों में हीटर की. आज यहां पर ऐसे तकरीबन 1500 घर हैं, जिनमें कूबर पेड़ी की पूरी आबादी रह रही है. इन्हें ‘डग-आउट्स’ कहा जाता है.
सारी सुख-सुविधाओं से लैस
ज़मीन के नीचे ये घर सभी सुख-सुविधाओं से लैस हैं. यहां कई हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग होती रहती है. 'पिच ब्लैक' फिल्म की शूटिंग के बाद प्रोडक्शन ने फिल्म का स्पेसशिप यहीं छोड़ दिया था. अब यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है.
