शहीद दरोगा मनोज के घरवालों का छलका दर्द, अखलाक के परिजनों को 75 लाख, 2 नौकरी, बड़ा घर मिला, हवाई जहाज की यात्रा और हमारे दरवाजे पर कोई सांत्वना तक देने नहीं आया ॥मनोज मिश्रा के पिता ने कहा की ड्यूटी करते करते शहीद हुए बेटे के नाम पर सरकार एक रुपया मुआवजा नहीं दे पाई, लेकिन गौहत्या के आरोपों से घिरे अखलाक के परिवार को अखिलेश सरकार 45 लाख का मुआवजा दे रही है.
मनोज के पिता ने कहा कि उनका बेटा शहीद हुआ है और वह उसकी शहादत बेकार नहीं जाने देंगे. उन्होंने कहा कि अपनी ड्यूटी करते हुए जान देने वाले पुलिस के दरोगा लिए सरकार के पास कहने को सांत्वना के दो शब्द भी नही हैं.
मनोज के पिता श्याम बिहारी ने कहा कि अगर जाति-बिरादरी देखकर सरकार मुआवजा देती है तो ऐसा लगता है कि ब्राह्मण होकर हमने गुनाह कर दिया. मनोज के पिता रोते हुए कहते हैं कि बेटे की मौत की सीबीआई जांच हो और दो बच्चों को नौकरी दी जाए.
उन्होंने कहा कि होनहार बेटा खोने का सरकार ये सिला न दे वरना कोई बाप अपने बेटे को पुलिस और सेना में मरने के लिए नहीं भेजेगा. उन्होंने फिर मांग दोहराई कि सरकार कम से कम एक स्मारक तो बनवा ही दे ताकि बेटे की आत्मा को ही शांति मिल जाए.
यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के हरदासपुर गांव के रहने वाले सब इंस्पेक्टर मनोज मिश्रा बरेली के फरीदपुर में पशु तस्करों की गोली का शिकार हो गए थे, लेकिन मनोज के परिजन उसकी हत्या में बरेली पुलिस की साजिश की बात कह सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. महीना होने को है लेकिन सरकार का कोई मंत्री तक मनोज के घर नहीं आया है. इससे परिवार और गुस्से में है.
अब दादरी कांड में मारे गए अखलाक की मौत और मुआवजे की बारिश से मनोज के परिजन व्यथित हैं. मनोज के दो बेटियां और एक बेटा है. मनोज के पिता कहते हैं कि मेरा बेटा पुत्र मनोज कुमार मिश्रा गौ हत्य को रोकने के लिए शहीद हुआ. उसको अभी तक सरकार और शासन की तरफ से कोई मुआवजा नहीं मिला है. जो बीस लाख का मुआवजा सबको मिलता है बस वहीं दिया गया और एक तरफ जो जो गौहत्या करवाते हैं उन्हें 45-45 लाख रुपया दिया गया.
उन्होंने कहा कि हमारा बेटा ऑन ड्यूटी शहीद हुआ उसका कुछ नहीं. मनोज की विधवा शशी मिश्रा कहती हैं कि हमारे पति जो ऑन ड्यूटी शहीद हुए हैं उनके परिवार के लिए सरकार ने कुछ भी नहीं किया है. अब बच्चों का पालन पोषण कैसे होगा.
उन्होंने कहा कि जो गौकशी को रोकना चाहते थे, उनके लिए कुछ भी नहीं मुख्यमंत्री ने तो एक शब्द भी नहीं कहा ये दुखद है. आज हम टीवी अखबारों में दादरी कांड देखते हैं तो दुःख बढ़ जाता है. मुआवजा तो गया दूर सरकार दुख ही जता देती तो कुछ भार हल्का हो जाता.
