आत्मरक्षा में अगर किसी की जान ले ली जाए तो अपराध नहीं - DGP

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मां-बहन की इज्जत पर हाथ डालने वालों की जान लेना अपराध नहीं
   चंडीगढ़।। मां-बहन की इज्जत पर हाथ डालने वालों को मार डालने वाले बयान के संबंध में डीजीपी डॉ. केपी सिंह ने शुक्रवार को फिर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि उनकी बात को सही संदर्भ में नहीं लिया गया। बल्कि गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 100 और 103 में आम आदमी को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि आत्मरक्षा करने में या किसी की मदद करते समय अगर अपराधी उसके हाथों मारा भी जाए तो भी वह अपराध नहीं है। कानून की यह धारा आम आदमी को सुरक्षा प्रदान करती है।
      पंचकूला में जुवेनाइल वेवर सिस्टम पर आयोजित सेमिनार में डीजीपी सिंह ने बताया कि जींद में वे गुरुवार को पुलिस और पंच-सरपंचों के तालमेल सम्मेलन में यही कानूनी प्रावधान समझाए थे। उन्होंने पंच-सरपंचों को सामान्य भाषा में समझाते हुए कहा था कि अगर उनके सामने कहीं कोई अपराध हो रहा है तो वे पुलिस का इंतजार न करें, बल्कि खुद भी कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उदाहरण स्वरूप अगर कहीं कोई व्यक्ति किसी महिला से बलात्कार की कोशिश कर रहा है, या एसिड डालकर भाग रहा है तो ऐसे में पहले पीड़ित महिला की मदद करने की जरूरत है, न कि पुलिस को ढूंढने की। इस दौरान अपने निजी बचाव में यदि अपराधी की मृत्यु भी हो जाए तो उसमें घबराने की जरूरत नहीं है।




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