सरकार की एक जांच में खुलासा हुआ है कि स्वयंभू संत आसाराम बापू ने 2008-09 से अपने पास 2,300 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति जुटा रखी है। इस संपत्ति के लिए उनका टैक्स अभी भी बकाया है। 3 साल पहले राजस्थान के जोधपुर में अपने आश्रम में 16 साल की बच्ची से कथित रेप के बाद 75 साल के आसाराम जेल में बंद हैं।
अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच में सामने आया है कि आसाराम बापू के पास 2300 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति है। इस आधार पर आयकर विभाग ने आसाराम बापू के चैरिटेबल संस्थानों को टैक्स में दी जाने वाली राहत को बंद किए जाने की सिफारिश की है।
धार्मिक संस्थाओं को आयकर के नियम 80 G के तहत छूट मिलती है। वहीं, इन संस्थाओं को चंदा, दान के साथ ही अपने समर्थकों के साथ घरेलू कारोबार में मदद की इजाजत होती है। आसाराम पर अपने समर्थकों के लोन स्कैम की भी चर्चा है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि आसाराम ने अपने अनुयायियों के जरिए कर्ज देने वाली योजना भी चलाई थी, जिसके तहत व्यक्ति या संस्था को 1 या 2 प्रतिशत मासिक ब्याज पर नकद कर्ज उपलब्ध कराया जाता था।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच में दावा किया गया है कि आसाराम की संस्थाओं की तरफ से बेनामी निवेश, समर्थकों के रियल एस्टेट, म्यूचुअल फंड, शेयर, किसान विकास पत्र और जमा खातों के जरिए कई करोड़ रुपए बाजार में लगाए गए हैं।
अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच में सामने आया है कि आसाराम बापू के पास 2300 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति है। इस आधार पर आयकर विभाग ने आसाराम बापू के चैरिटेबल संस्थानों को टैक्स में दी जाने वाली राहत को बंद किए जाने की सिफारिश की है।
धार्मिक संस्थाओं को आयकर के नियम 80 G के तहत छूट मिलती है। वहीं, इन संस्थाओं को चंदा, दान के साथ ही अपने समर्थकों के साथ घरेलू कारोबार में मदद की इजाजत होती है। आसाराम पर अपने समर्थकों के लोन स्कैम की भी चर्चा है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि आसाराम ने अपने अनुयायियों के जरिए कर्ज देने वाली योजना भी चलाई थी, जिसके तहत व्यक्ति या संस्था को 1 या 2 प्रतिशत मासिक ब्याज पर नकद कर्ज उपलब्ध कराया जाता था।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच में दावा किया गया है कि आसाराम की संस्थाओं की तरफ से बेनामी निवेश, समर्थकों के रियल एस्टेट, म्यूचुअल फंड, शेयर, किसान विकास पत्र और जमा खातों के जरिए कई करोड़ रुपए बाजार में लगाए गए हैं।
