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दुनिया भर से किसी न किसी रूप में महिलाओं को प्रताड़ित करने की ख़बरें आती रहती हैं. कभी यौन शोषण, कभी बाल विवाह, कभी तस्करी, कभी वेश्यावृत्ति, दहेज़ के बदले मौत और जाने कितने ही तरीके हमने ईजाद कर रखे हैं, औरत के अस्तित्व को कुचलने के. लेकिन वो क्या है न कि प्रकृति मरती नहीं है, सिर्फ़ हम हाथ-पैर मार रहे हैं, प्रकृति (जननी) को मिटाने की. जिसमें हम खुद जी रहे हैं, उसके ख़त्म होने का तात्पर्य तो हम सभी का ख़त्म होना ही है न? हम ज़िंदा रहें, इसलिए यह प्रकृति हमारी तमाम चोटें सहकर भी, मर-मरकर भी ज़िंदा रहती है.
यमन में हाल ही में एक आठ साल की बच्ची अपनी शादी की रात दुनिया छोड़ गई. आप सोच रहे होंगे कि क्यों? आपको बता देते हैं कि दरअसल, उसे पांच गुना ज़्यादा उम्र के व्यक्ति के साथ ब्याह दिया गया था और शादी की रात ही अंदरूनी चोट के कारण उसकी मौत हो गई. उसकी क्या गलती थी, ये आप ही सोचिए. इससे पहले 2010 में एक ऐसा मामला सामने आया था, जब यमन में ही बच्चे को जन्म देते हुए एक 12 साल की बच्ची की मौत हो गई थी. यमन में ऐसे बहुत से मामले सुनने में आते हैं. इस देश में एक चौथाई से ज़्यादा छोटी बच्चियों की शादी अधेड़ पुरुषों से कर दी जाती है और वे कई बार असमय मौत का शिकार भी हो जाती हैं.
आठ साल की ये बच्ची दुल्हन तो बन गई थी, लेकिन शादी वाली रात ही उसके भीतरी अंगों में चोट लगने के बाद उसने दम तोड़ दिया. इस घटना ने एक बार फिर दुनिया भर में बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों के बीच निराशा और नाराज़गी पैदा कर दी है.
यमन में गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले 80 प्रतिशत लोग हैं. इसके कारण लोग अपनी बेटियों को बचपन में ही बेच देते हैं और उन्हें अपने बच्चों के बदले काफी पैसा मिल जाता है. इस तरह उन बच्चियों की अधेड़ों से शादी कर दी जाती है. फिर उनके साथ जो होता है, वो दुनिया जानती है. मासूम सी बच्चियों के साथ होने वाली ये ज्यादती क्या दिल में बेचैनी पैदा नहीं करती? क्या हम छोटी-छोटी कोशिशें नहीं कर सकते, जिनके माध्यम से हम जागरूकता फैला सकें. हमें ये मानवता के वास्ते सोचना होगा, हमें जागना होगा, लोगों को भी जगाना होगा. ये ध्यान रखना होगा कि ये अपराध यमन में ही नहीं, हिंदुस्तान में भी होता है.
