महंगाई पर चिंता बढ़ी

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    सरकार खुफिया ब्यूरो (आईबी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और राज्यों की पुलिस जैसी एजेंसियों को लगाकर भी बेलगाम हो रही महंगाई को काबू में रखने में नाकाम रही है.
    यह कहना गलत नहीं होगा कि अब तक ये एजेंसियां सरकार के किसी काम नहीं आ सकी हैं.
      सरकार ने खाने की चीजों के भाव नियंत्रित रखने के लिए इन एजेंसियों को अपने हाथ खोलने के लिए कहा था, पर वस्तुओं के भाव हैं कि ऊपर ही चल रहे हैं. सरकार दाल को 120 रुपए से महंगा नहीं बिकने देना चाहती है, क्योंकि इससे यह खराब संदेश चला जाता है कि गरीब की थाली से दाल भी छीन गई है.
     दबाव बढ़ाने के लिए बृहस्पतिवार को उपभोक्ता मामलों के सचिव ने आईबी, डीआरआई और राज्यों के पुलिस प्रमुखों की बैठक बुलाई. बैठक का एजेंडा ही यह था कि ऐसे व्यापारियों की धरपकड़ की जाए जो गिरोह बनाकर अपने से वस्तुओं के भाव बढ़ाते हैं या जमाखोरी करते हैं. यह बैठक 11.30 बजे शुरू हुई और एक घंटे चली.
    बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के खाद्य और उपभोक्ता मामलों के सचिव और पुलिस प्रमुख भी शामिल थे. यह बैठक उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश के लिए थी. उत्तर प्रदेश को छोड़कर इन सभी राज्यों में भाजपा की सरकार है.
      सरकार की तरफ से कहा गया कि महंगाई रोके जाने में जमाखोरी और अपने से वस्तुओं के भाव बढ़ाने वाले व्यापारियों को रोकने के लिए अब तक ऐसे प्रयास नहीं किए गए जिनसे व्यापारियों को महंगाई पर सरकार के कड़े रुख का पता चलता. सरकार ने आईबी, डीआरआई और राज्यों की पुलिस को एक बार फिर कहा है कि वह अपने पूरे रंग में आ जाए क्योंकि सरकार महंगाई के मोच्रे पर किसी समझौते के मूड में नहीं है.
कैबिनेट सचिव ने की अलग बैठक
    कैबिनेट सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा ने भी महंगाई को लेकर दिन में 12.30 बजे सचिवों की बैठक बुलाई. बैठक में खाद्य और उपभोक्ता, कृषि, वाणिज्य और राजस्व विभागों के सचिवों ने भाग लिया. इसमें यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि अधिक दाल विदेश से समय पर मंगा ली जाए. साढ़े छह लाख टन दाल विदेश से मंगाई जानी है, देशी बाजार से लगभग डेढ़ लाख टन मिलने का अनुमान है.
जेटली की महंगाई पर बैठक 22 को
     सरकार की प्राथमिकता सूची में महंगाई सबसे ऊपर नजर आ रही है. यही वजह है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली 22 जून को फिर से इस मामले में बने मंत्रिसमूह की बैठक करेंगे. बैठक में सरकार इस बात की समीक्षा करेगी कि महंगाई को काबू में करने को लेकर उसने जो कदम उठाए हैं, उसमें क्या कमजोरी है. बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र तो महंगाई को लेकर अलग कानून बनाने पर ही काम कर रहा है.
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