आगरा।। देश की सरहद पर शहीद होने वाले सैनिक का जहां पूरे देश में सम्मान
के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है वहीं उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में
सेना के एक जवान की शहादत के बाद अपमान का मामला सामने आया है। अंतिम
संस्कार के लिए उनके परिजनों को गांव में सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल के
लिए कड़ी मशक्कत इसलिए करनी पड़ गई क्योंकि वह दलित समुदाय से संबंध रखता
था।
फिरोजादाब के वीर सिंह के गांव नगला केवल में कुछ सवर्ण
लोगों ने गांव की सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल का इसलिए विरोध किया क्योंकि
शहीद जवान दलित समुदाय से संबंध रखता था। शहीद कांस्टेबल नट समुदाय से था
जिसकी वजह से कुछ लोग अंतिम संस्कार के लिए जमीन देने का विरोध कर रहे थे।
इस घटना के बाद जब जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया तब जाकर ऊंची जाति के
लोग जवान के अंतिम संस्कार के लिए दस वर्गमीटर की जमीन देने को तैयार हुए।
जानकारी के मुताबिक, शहीद
के परिजन एक सार्वजनिक जमीन पर शहीद का अंतिम संस्कार करना चाह रहे थे और
उसके सम्मान में एक प्रतिमा स्थापित करवाना चाहते थे लेकिन गांव के सवर्णों
ने इसपर ऐतराज जता दिया। आपको बता दें कि गांव की इसी सार्वजनिक जमीन पर
प्रत्येक साल मेला लगता है।
ग्राम प्रधान विजय सिंह ने बताया, कुछ ग्रामीणों को शहीद का अंतिम संस्कार सार्वजनिक जमीन पर किए जाने और वहां शहीद की प्रतिमा स्थापित करने की मांग पर आपत्ति थी लेकिन बाद में जब एसडीएम ने ग्रामीणों से बातचीत की तो लोग शहीद के परिवार की मांग का सम्मान करने के लिए राजी हो गए।
पंपोर हमले में शहीद हुए 52 वर्षीय वीर सिंह अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। वीर सिंह 1981 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे।
ग्राम प्रधान विजय सिंह ने बताया, कुछ ग्रामीणों को शहीद का अंतिम संस्कार सार्वजनिक जमीन पर किए जाने और वहां शहीद की प्रतिमा स्थापित करने की मांग पर आपत्ति थी लेकिन बाद में जब एसडीएम ने ग्रामीणों से बातचीत की तो लोग शहीद के परिवार की मांग का सम्मान करने के लिए राजी हो गए।
पंपोर हमले में शहीद हुए 52 वर्षीय वीर सिंह अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। वीर सिंह 1981 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे।
