जब रिक्शा और ठेला चालकों के बीच जा पहुंचींं ये महिला कलेक्टर

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      मध्यप्रदेश के मंडला जिला कलेक्टर प्रीति मैथिल अचानक रिक्शा और हाथ-ठेला चालकों से मिलने उनके बीच फुटपाथ पर पहुंच गईं और उन्हें नगर पालिका के शिविर में आने का आमंत्रण दिया. महिला कलेक्टर को अपने बीच पाकर मेहनतकश मजदूरों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और कलेक्टर से मिले आश्वासन से जीने की नई उम्मीद जाग उठी है.
     दरअसल, मुख़्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत रिक्शा और हाथठेला चालकों लिए शुक्रवार को नगर पालिका प्रशासन एक शिविर का आयोजन कर रहा है. जिसका पालिका प्रबंधन ने कोई कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया है.
     नगर पालिका के सीएमओ बारपी सोनी की मानें तो 2009 से संचालित इस योजना के तहत नगरीय क्षेत्र में 276 हाथ ठेला और 193 रिक्शा चालक पंजीकृत हैं, जिसका रियालिटी टेस्ट करने कलेक्टर खुद उनके बीच पहुंच गईं.
     कलेक्टर ने जब हाथठेला और रिक्शा चालकों से बात कर हकीकत जानी तो नगरपालिका के दावों की पोल खुल गई. कलेक्टर ने अलग-अलग चौराहों पर रिक्शा चालकों से बात की तो पता चला कि शहर में ज्यादातर हाथ ठेला और रिक्शा चालकों के पास खुद के रिक्शा और हाथ ठेला नही हैं. ये लोग दूसरों से दिहाड़ी में किराया देकर रिक्शा और हाथ ठेला चला रहे हैं और इन्हें कल नगरपालिका में आयोजित शिविर की जानकारी भी नहीं है.
    नगरपालिका के रिकार्ड में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत करीब 500 हितग्राहियों को रिक्शा और हाथ ठेला वितरित किया जाना दर्ज़ है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है. इसकी भनक शायद जिले की नवागत कलेक्टर प्रीति मैथिल को लग चुकी है. ठेला चालकों की मानें तो मामले की जांच होने पर मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में बड़ा भ्रस्टाचार सामने आ सकता है.


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