बच्चो को पढ़ाने के लिए रोज करता है पहाड़ो की चढाई, ये 50 साल का टीचर!

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     यदि आपके मन में कोई काम करने की लगन और हिम्मत है तो आप कोई भी काम केसे भी कर सकते है चाहे उसके लिए आपको कितना भी मुश्किल सफर तय करना पड़े! आप उस काम को कर ही लेते है !
      एसे ही मिसाल दी है 50 साल के सुरेश बी चलगेरी पिछले सात साल और नो महीने से पहाड़ पर चढकर और लगभग 8 किलोमीटर की दुरी तय करके बच्चो को पढ़ाने जाते है! कर्नाटक के गडग का बेरापुर लोअर प्राइमरी स्कूल सुरेश की मेहनत से ही चल रहा है ! नहीं तो ये स्कूल कब का ही बंद हो जाता!
    गडग का बेरापुर ये स्कूल पहाडियों में बसा हुआ है ! जब सुरेश यहाँ आये थे ! तो यहाँ बहुत ज्यादा अव्यवस्था थी! इस गाँव के आस पास मात्र ये ही एक सरकारी स्कूल था! और लन्बानी जनजाति के लोगो के सारे बच्चे सभी इसी स्कूल में पढ़ते है!
     सुरेश कहते है की जब में पहली बार इस स्कूल के लिए बस से उतरा तो मुझे ये पता नहीं था की स्कूल कहा है! मुझे बस इतना सा पता था की स्कूल क्लाकलेश्वर मंदिर के पास है! जब किसी से पूछा तो पता चला की स्कूल जाने के लिए पहाड चढने के आलावा और कोई विकल्प नहीं है!
     उसके बाद से सुरेश रोज पहाड चढ कर ही स्कूल जाते है और धीरे-धीरे सुरेश बच्चो के लिए स्कूल की किताब और राशन भी लाद के ले जाते है! और उन्होंने इस समय कोई छुटी भी नहीं ली! सुरेश का कहना है की मेरी स्कूल में 60 बच्चे है मेंरी जिमेदारी है की में इनकी संख्या कम नहीं हो और इनको अच्छी से अच्छी शिक्षा मिले! सुरेश बताते है की इस स्कूल में में ही हेडमास्टर हूँ में ही टीचर हूँ और में ही चपरासी हूँ!
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