यह कानून तभी बनेगा जब सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन की डिमांड संसद के दोनों सदनों तक पहुंचेगी और उस पर चर्चा होगी। जी हां सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन इस प्रकार की घरेलू हिंसा पर सख्त कानून बनाने की मांग बहुत पहले से कर रहा है।
फाउंडेशन के समन्वयक सुजीत देश पांडे कहते हैं कि बिजनौर संगीता केवल अपनी सास पर ही जुल्म नहीं ढहाती थी, बल्कि अपने पति को प्रताड़ित करने में पीछे नहीं रहती थी। यह बात संगीता का पति जानता था कि वो कभी भी अपनी सास पर हाथ उठा सकती है। इसीलिये उसने खुद अपने घर में सीसीटीवी कैमरा लगाया, अपनी पत्नी को रंगे हाथों पकड़ने के लिये। वीडियो वायरल होते ही संगीता को गिरफ्तार किया गया, लेकिन थोड़ी ही देर में छोड़ दिया गया, क्योंकि ऐसी बहुओं पर हमारा कानून हलका है।
देश पांडे के अनुसार इससे भी गंभीर मामले उनके पास आते हैं, जिनमें बहुएं भारतीय कानून का नाजायज़ फायदा उठाकर पति व उसके परिवार को फंसाने के चक्कर में रहती हैं। वर्तमान कानून के अंतर्गत अगर एक महिला मजिस्ट्रेट के सामने खड़े होकर एक बयान देदे, तो उसकी बिला पर पति या उसके घर वालों को तुरंत जेल हो सकती है। इसलिये जब तक पुरुषों को प्रताड़ना से बचाने वाले कानून नहीं बनते, तब तक संगीता जैसी बहुओं की मनमानी जारी रहेगी।
फाउंडेशन के अध्यक्ष राजेश वखारिया कहते हैं अगर रेप पर कानून में संशोधन किया जा सकता है, तो घरेलू हिंसा के कानून में क्यों नहीं? हम उस कानून का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें महिला और पुरुष दोनों को बराबर की नजरों से देखा जाये। हर बार केवल पुरुष को दोषी नहीं ठहराया जाये।
