न्याय प्रणाली का मेरूदंड कहलाने वाली निचली अदालतों में है 5000 से अधिक न्यायाधीशों की कमी

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    भले ही, उच्चतम न्यायालय और 24 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की कमी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है लेकिन न्याय प्रणाली का मेरूदंड समझे जाने वाली अधीनस्थ अदालतों की स्थिति भी बहुत ही खराब है.
     कानून मंत्रालय का नवीनतम आंकड़ा बताता है कि ऐसे 5,111 न्यायिक अधिकारियों की कमी है जो देशभर में अधीनास्थ अदालतें चलाते हैं.
    तीस जून की स्थिति है कि जहां इन अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 21,033 न्यायाधीश होने चाहिए थे वहीं उनमें बस 16,192 न्यायाधीश हैं यानी की 5,111 न्यायिक अधिकारी कम हैं.
    ज्यादातर बड़े राज्यों में न्यायिक अधिकारियों का चयन उच्च न्यायालय द्वारा किया जाता है. ग्यारह राज्यों में अधीनस्थ न्यायपालिका में भर्ती उच्च न्यायालयों द्वारा की जाती है जबकि 17 राज्यों में यह काम राज्य लोक सेवा आयोग करते हैं.
     गुजरात 794 रिक्तियों के साथ रिक्त पदों की सर्वाधिक संख्या वाले राज्यों की सूची में शीर्ष पर है. उसके बाद बिहार का नंबर आता है जहां 792 रिक्तियां हैं. उत्त्र प्रदेश निचली अदालतों में 595 रिक्तियों के साथ तीसरे नंबर पर है.
    चौबीस उच्च न्यायालयों में करीब 450 न्यायाधीशों की कमी है. देशभर में अदालतों में करीब तीन करोड़ मामले लंबित हैं.

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