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विधायकों को 700 करोड़ अतिरिक्त राशि देने की फाइल लौटाई एलजी ने


Image may contain: 1 person , beard and close-up     दिल्ली सरकार द्वारा सभी 70 विधायकों को एमएलएलैड स्कीम के तहत 700 करोड़ रुपए अतिरिक्त फंड दिए जाने के दिल्ली मंत्रिमंडल के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए उपराज्यपाल ने फाइल लौटा दी है.
      तथा उन्होंने जानना चाहा है कि पिछले वित्त वर्ष में सभी विधायकों द्वारा इस निधि से खर्च करने का रिकार्ड कैसा रहा इसकी जानकारी दें.
     सूत्रों के अनुसार उपराज्यपाल ने मंत्रिमंडल के निर्णय पर तीन टिप्पणी लगाकर फाइल शहरी विकास मंत्री सत्येन्द्र जैन को वापस भेजी है. अब मंत्री के आदेशानुसार शहरी विकास विभाग सभी विधायकों द्वारा वित्त वर्ष 2015-16 में किए खर्च का ब्योरा तैयार कर उपराज्यपाल को भेजेंगे.
      सूत्रों के अनुसार उपराज्यपाल ने लौटाई हुई फाइल में जानना चाहा है कि देश के अन्य राज्यों में विधायकों को एमएलएलैड में कितनी राशि दी जाती है या कितनी अतिरिक्त राशि दिए जाने का प्रावधान है. इस प्रश्न के आलोक में शहरी विकास विभाग के अधिकारी देश के हर राज्य के शहरी विकास विभाग को पत्र लिखकर ब्योरा जुटाएंगे. फिर सभी राज्यों से प्राप्त जवाब को एकत्रित कर उपराज्यपाल को भेज दिया जाएगा लेकिन देश भर के सभी राज्यों से ब्योरा मंगाने व संयुक्त रिपोर्ट तैयार करने में समय लगेगा.
     तीसरे, उपराज्यपाल ने पूछा है कि प्रत्येक विधायक को एमएलएलैड स्कीम के अलावा अन्य किस प्रकार का फंड मुहैया कराया जाता है इसकी जानकारी भी दी जाए. तीनों प्रश्न की समुचित जानकारी जुटाने के बाद ही यह फाइल दोबारा राजनिवास भेजी जा सकेगी.
     उपराज्यपाल द्वारा पूछे प्रश्नों के आधार पर फिलहाल एमएलएलैड स्कीम के तहत 700 करोड़ अतिरिक्त राशि तुरंत देने के फैसले पर तत्काल विराम लग गया है.
      मंत्रिमंडल ने पिछले महीने फैसला लिया था कि विधायकों को दी जाने वाली चार करोड़ की राशि में दस करोड़ अतिरिक्त राशि इस वित्त वर्ष में दी जाए ताकि विकास कार्य तेजी से हो सके. यानि सत्तर विधायकों को सात सौ करोड़ अतिरिक्त राशि देने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दे दी थी.
      इस 700 करोड़ की राशि का बजट में प्रावधान नहीं किया गया था इसलिए पुल निर्माण, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग व स्वास्थ्य विभाग के बजट में कटौती कर 700 करोड़ की राशि मुहैया कराने का प्रावधान किया गया था. अन्य विभागों से कटौती कर योजना विभाग के अधिकारी ने सात सौ करोड़ की राशि जुटा ली थी लेकिन अब उपराज्यपाल ने फाइल पर तीन प्रश्न लगाकर इसे वापस भेज दिया है.