
देहरादून।)। उच्च न्यायालय के कड़े रूख को देखते हुए उत्तराखण्ड राज्य सम्पति विभाग ने प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास दो महीने के अंदर खाली करने फरमान जारी किया है। गौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उप्र के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने के आदेश दिया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में भी इसी सम्बंध में एक जनहित याचिका दायर कर उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्रियों से भी सरकारी आवास खाली करने की गुहार लगायी। उच्च न्यायालय ने राज्य सम्पति विभाग ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तर्ज पर ही फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास को खाली कराने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय के फरमान के बाद अब यह कदम उठाया। इसके बाद प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों में खलबली मच गयी है। इन पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों में भगतसिंह कोश्यारी, नारायणदत्त तिवारी, भुवनचंद खण्डूडी, रमेश पोखरियाल व विजय बहुगुणा है। इस आदेश को भाजपा के 4 नेताओं भगतसिंह कोश्यारी, भुवनचंद खण्डूडी, रमेश पोखरियाल व विजय बहुगुणा पर ही गाज गिरेगी। कांग्रेस के केवल नारायणदत्त तिवारी ही है। देखना यह है कि प्रदेश की हरीश रावत सरकार उप्र की अखिलेश सरकार की तरह इन पूर्व मुख्यमंत्रियों को पुन्न संरक्षण देती है या उनसे सरकारी आवास वापस लेती है?