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बड़े नोटों पर पाबंदी कालेधन की अर्थव्यवस्था के खिलाफ 'साहसिक कदम' : गेट्स

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     भारत में बड़े मूल्य के नोटों के चलन पर प्रतिबंध के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय की तारीफ करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने कहा है कि यह एक 'साहसिक कदम' है और इससे देश में कालेधन की अर्थव्यवस्था घटेगी.
     नीति आयोग द्वारा यहां आयोजित भारत का कायाकल्प शीषर्क व्याख्यान माला का दूसार व्याख्यान देते हुए गेट्स ने कहा कि डिजिटल तरीकों से लेनदेन से पारदर्शिता बढ़ेगी और रिसाव कम होगा.
गौरतलब है कि मोदी ने आठ नवंबर को अप्रत्याशित निर्णय कर 500 और 1000 रपये के पुराने नोटों का चलन बंद कर दिया है.
     गेट्स ने कहा, 'ऊंचे मूल्य के नोटों को चलन से बाहर करने और उनके बदले नए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों वाले नोटों को लाने का कदम भारत में कालेधन की अर्थव्यवस्था को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल वित्तीय समावेश के सभी साधन मौजूद है. आधार से खाता खोलने की कागजी कार्रवाई कम होगी और यह काम 30 सेकेंड में हो जागा.
     आधार से एक एकीकृत डाटा भंडार भी बनेगा. जल्दी ही शुरू होने वाले भुगतान बैंक और मोबाइल फोने के सर्वत्र प्रसार से हर भारतीय को डिजिटल खाते और हर प्रकार की कंप्यूटर प्रणाली से सम्पर्क की जा सकने वाली और धोखाधड़ी से निरापद भुगतान प्रणाली के साथ जोड़ा जा सकता है.
      स्वास्थ्य के संदर्भ में गेट्स ने कहा कि 'यदि भारत में स्वास्थ्य संबंधी किसी एक समस्या का समाधान करने की कोई जादू की छड़ी मेरे पास हो तो मैं उससे कुपोषण के संकट को दूर करना चाहूंगा.’ भारत में कुछ ऐसे राज्य एवं क्षेत्र हैं जहां कुपोषण कोई अनोखी नहीं बल्कि एक सामान्य बात है. उन्होंने बच्चों में कुपोषण के चलते भारत की अर्थव्यवस्था को 2030 तक सालाना 46 अरब डालर का नुकसान होने का अनुमान है. देश में पांच वर्ष से कम के 4.4 करोड़ बच्चों का शारीरिक विकास कम है.