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मुठभेड़ में सिमी आतंकियों के खात्मे पर मप्र पुलिस को सलाम : बिट्टा

    भोपाल केन्द्रीय कारागार से फरार हुए सिमी के आठ कार्यकर्ताओं को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराए जाने की घटना पर मनिन्दरजीत सिंह बिट्टा ने मध्यप्रदेश सरकार का पुरजोर समर्थन किया.
    बिट्टा ने गुरुवार को भोपाल में कहा कि इन आतंकियों के खात्मा करने के लिये वह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश की बहादुर पुलिस जवानों को सलाम करते हैं.
    अखिल भारतीय आतंकवाद विरोधी मोर्चे के चेयरमेन बिट्टा ने संवाददाताओं से कहा, ''आज मध्यप्रदेश आने के बाद मैं पहली बार मुख्यमंत्री चौहान से मिला. आतंकवादियों के खात्मे के लिये मैं चौहान और मध्यप्रदेश पुलिस को सलाम करता हूं.''
   युवा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बिट्टा ने कहा, ''मैंने मुख्यमंत्री को कहा है कि वह एनकांउटर की जांच कराने संबंधी बयान न दें.'' उन्होंने कहा, ''जेलब्रेक और सुरक्षा खामियों (जिसके कारण सिमी कार्यकर्ता जेल से फरार हुए और बाद में मुठभेड़ में मारे गये) की जांच तो होनी चाहिये, लेकिन सिमी आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ की जांच नहीं होनी चाहिये.''
     मध्यप्रदेश सरकार भी मुठभेड की जांच नहीं चाहती है और प्रदेश के गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने दो दिन पहले सवांददाताओं को अनूपपूर जिले में कहा था कि मुठभेड़ की जांच की कोई जरूरत नहीं है.
    बिट्टा ने बताया, ''ये मारे गए सिमी आतंकी मध्यप्रदेश, ओडिशा एवं अन्य राज्यों में बम धमाके, डकैती एवं अन्य घृणित अपराधों में लिप्त थे.''
    मनिन्दरजीत सिंह बिट्टा ने कहा, ''जेल में एक प्रधान प्रहरी की हत्या करने के बाद वहां से भागे इन आतंकियों के कारण आम जनता की जिन्दगी खतरे में थी. यदि वह छूट जाते तो कई और बेहगुनाह लोगों को मार सकते थे.''
     उत्तर प्रदेश में आतंकियों के परिजनों से मिलने और 'ओसामा जी' (मारा गया अंतराष्ट्रीय आतंकवादी) टिप्पणी के लिये कांग्रेस के महासिचव दिग्विजय सिंह पर बरसते हुए उन्होंने कहा, ''आतंकवाद पर वोट बैंक की राजनीति बंद होनी चाहिये.''
    बिट्टा ने कहा, ''दिग्विजय सिंह एक राजनीतिक हत्यारे हैं और राजनीतिक आतंकवाद में लिप्त रहे हैं.'' उन्होंने आरोप लगाया, ''केन्द्र में कांग्रेस सरकार के दौरान दिग्विजय ने मेरी सुरक्षा हटाने का प्रयास कर मुझे मारने की इच्छा रखने वाले आतंकवादियों की मदद करने की कोशिश की थी.''
    उन्होंने कहा, ''मैं बमों से नहीं हारा हूं. मैं हारा हूं तो कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम और दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेसी नेताओं से. मैं तो राजनीतिक आतंकवाद से हारा हूं और मैं इसका शिकार हुआ हूं.'' एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि संप्रग-2 के कार्यकाल में दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए 'भगवा आतंकवाद' एवं 'हिन्दू आतंकवाद' नारों के कारण ही कांग्रेस पिछला लोकसभा चुनाव हारी थी.
     बिट्टा ने बताया कि दिग्विजय सिंह के बड़बोलेपन और कांगेस नेता आनंद शर्मा के अहंकार की कीमत पार्टी को पिछले लोकसभा चुनाव में चुकानी पड़ी थी. उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल एवं केपीएस तुलसी की भी यह कहकर कड़ी आलोचना की कि इन दोनों ने पूर्व में अदालतों में आतंकवादियों की पैरवी की है.
    इसके बाद, मनिन्दरजीत सिंह बिट्टा यहां मारे गये जेल के प्रधान आरक्षक रमाशंकर यादव के निवास पर भी गये और वहां उनके परिवार को सांत्वना दी. भोपाल केन्द्रीय जेल से 31 अक्तूबर को आठ सिमी कार्यकर्ताओं ने भागने से पहले यादव की गला रेत कर हत्या कर दी थी.
     बिट्टा ने प्रधान आरक्षक की बेटी सोनिया (24) को सरकारी नौकरी दिलाने में सहायता करने तथा उसे किसी भी प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिये दिल्ली में पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया. शोकाकुल परिवार द्वारा सेना में गुवाहटी और हिसार में पदस्थ यादव के दो बेटों शंभुनाथ और प्रभुनाथ में से किसी एक का भोपाल स्थानांतरण कराने की मांग पर भी उन्होंने पूरी मदद करने का वादा किया.
    इसके साथ ही कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बिट्टा ने सोनिया से कहा कि वह नौ दिसंबर को होने वाली उसकी शादी में शामिल होने जरूर आयेंगे. उन्होंने कहा कि शहीद सिपाही के परिवार को अपने परिजन को खोने की पहले ही काफी पीड़ा है. लेकिन अब उससे ज्यादा पीड़ा उन्हें इस बात से हुई होगी कि एक शहीद को भी राजनीति का कारण बना दिया है. उन्होंने कहा, ''किसी राजनीतिक पार्टी का नेता, जो लोगों से वोट मांगते हैं, यहां उनकी अर्थी को कंधा देने नहीं आया. इसको गंदी राजनीति कहते हैं. शहीद, शहीद होता है वह किसी पार्टी का नहीं होता है.''
     आतंकवाद के आरोपियों के लिये फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाये जाने के मुख्यमंत्री चौहान के सुझाव पर उन्होंने कहा, ''नहीं मेरी मांग इससे भी अधिक है कि आतंकवाद के मामलों के जल्दी निपटारे के लिये 'एंटी टेररिस्ट मिलिटरी कोर्ट' होना चाहिये. जिसमें छह माह के अंदर सजा तय होनी चाहिये. उसमें आतंकवादियों को लम्बा नहीं रखा जाये. इन मामलों को लम्बा रखने से ही एनकाउंटर और बेगुनाहों के कत्ले आम जैसी वारदातें होती हैं.''
     उन्होंने कहा कि वह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रदेश में आतंकवाद से पीड़ित परिवारों की आर्थिक सहायता के लिये एक कोष की स्थापना करने का सुझाव देंगे.