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2000 की नोट का चमत्कार! रिश्वतखोर गिरफ्तार

Image result for 2000 note      2000 की नए नोट ने अपना पहला ‘चमत्कार’ दिखा दिया है। गुजरात में दो सरकारी अधिकारियों ने नई करंसी में ढाई लाख रुपये रिश्वत ली और कुछ घंटों के अंदर ही दोनों अफसरों को पूरे नकद के साथ पकड़ लिया गया। ये दोनों सरकारी अधिकारी पोर्ट ट्रस्ट में काम करते हैं। गुजरात एंटी करप्शन ब्यूरो ने अधिकारियों पास से ढाई लाख रुपये बरामद भी कर लिए। बाद में जब उनके घर की तलाशी ली गई तो एक के घर से 40 हजार रुपये की नई करंसी और भी बरामद हुई। दरअसल शुरू से ही बात हो रही है कि नई करंसी में कुछ ऐसे सेफ्टी फीचर्स हैं, जिससे इन्हें आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। ये कोई चिप नहीं बल्कि ऐसा हाईटेक फीचर है, जिससे नई नोट को छिपाना और रिश्वत के तौर पर लेना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।
कैसे पकड़े गए दोनों रिश्वतखोर अफसर?

       कांडला पोर्ट ट्रस्ट के इन दोनों अधिकारियों पी श्रीविवासु और के कोमटेकर ने एक क्लाइंट से 4.4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। 11 नवंबर को नोटबंदी के बाद अफसरों ने उससे कहा कि वो सारी रकम नई 2000 की नोट में ही दें। इन दोनों ने रिश्वत की रकम लेने के लिए अपने एक दलाल को भेजने की बात कही थी। इस बीच बड़ी की लेन-देन का सुराग लग गया। हमारे सूत्रों के मुताबिक इसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों ने रिश्वत देने वाली पार्टी से बात की, जिसने कबूल कर लिया कि उन्होंने कांडला पोर्ट ट्रस्ट के अधिकारियों को रिश्वत देने की तैयारी की है। इसके बाद पूरा जाल इस तरह से बिछाया गया कि पैसा एक हाथ से दूसरे हाथ में पहुंचने के बाद फौरन दोषियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
कैसे निकाली गई इतनी बड़ी रकम?
     यहां एक सवाल का जवाब अभी मिलना बाकी है कि रिश्वत देने जा रहे व्यक्ति के पास नई करंसी में इतनी बड़ी रकम आई कैसे? क्योंकि 2000 की नोट के जारी होने के बाद से अभी सिर्फ एक हफ्ता ही हुआ है और नियम के मुताबिक कोई व्यक्ति इस दौरान सिर्फ 24 हजार रुपये की नई करंसी ही निकाल सकता है। फिलहाल दोनों अधिकारियों और रिश्वत देने वाले से पूछताछ की जा रही है और बहुत जल्द गुजरात एंटी-करप्शन से इन सवालों के जवाब मिलने की भी उम्मीद है।
     फिलहाल यह खबर देश भर के भ्रष्टाचारियों और रिश्वतखोरों के लिए खतरे की घंटी है। क्योंकि इस घटना से इस बात की पुष्टि होती दिख रही है कि नई करंसी में कुछ ऐसे फीचर्स हैं जिसकी वजह से इनके अवैध लेन-देन पर नज़र रखना आसान है। अगर इतनी बड़ी रकम को रिश्वत देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है तो किसी न किसी स्तर पर मामला खुलना पक्का है। हालांकि नए सेफ्टी फीचर्स पर रिजर्व बैंक की तरफ से कोई स्पष्ट जानकारी अभी तक नहीं दी गई है।