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एक साल में अयोध्या विवाद नहीं सुलझा तो कानून के जरिए बना लेंगे राम मंदिर : स्वामी

स्वामी ने कहा कि 2018 में राज्यसभा में मोदी सरकार का बहुमत हो जाएगा। इसके बाद जरूरी कानून बनाकर राम मंदिर बना लिया जाएगा।
    नई दिल्ली।। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे राम मंदिर विवाद मामले में पिटीशनर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि इस मसले का हल निकालने की राह में मुस्लिम संगठन खलल पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विवाद का हल निकालने की आउटर लिमिट अप्रैल 2018 है। यानी अगले 13 महीने के अंदर हल नहीं निकलता है तो कानून के जरिए मंदिर बना लिया जाएगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जल्दी सुनवाई करने की स्वामी की पिटीशन पर मंगलवार को सुनवाई की थी। कोर्ट ने कहा था कि सभी संबंधित पक्ष मिलकर बात करें और इस मामले का हल निकालें। जरूरत पड़ने पर खुद कोर्ट दखल देगा। इसके लिए वह मीडिएटर बनने को भी तैयार है। 
और क्या बोले स्वामी...
- एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, स्वामी ने कहा, ''सभी मुस्लिम पक्षों ने कल टीवी चैनलों पर कहा कि आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट की कोशिशें वक्त की बर्बादी हैं। इस मामले की सुनवाई सिर्फ सुप्रीम कोर्ट को करनी चाहिए।''
- उन्होंने कहा, ''वे (मुस्लिम संगठन) सुनवाई में खलल पैदा कर रहे हैं। वे किसी भी तरह से इस मामले में देरी करने की कोशिश कर रहे हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने साढ़े छह साल से पेंडिंग है।''
- स्वामी ने कहा, ''या तो हम सुप्रीम कोर्ट के मीडिएशन के जरिए किसी हल को तलाशें या फिर हर दिन सुनवाई हो। अगर वे (मुस्लिम संगठन) सुनवाइयों को टालने की कोशिश करते हैं, तब भी अप्रैल 2018 आउटर लिमिट होगी।''
इस तरह दिए 2018 के संकेत
- न्यूज एजेंसी वार्ता की खबर मुताबिक, स्वामी ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के जरिए इस विवाद का हल नहीं निकलता है तो 2018 में कानून बनाकर राम मंदिर बना लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत के जरिए हल ढूंढने का सुझाव दिया है। लेकिन मुस्लिम समुदाय के रुख से लगता नहीं कि वे राम मंदिर बनाने के लिए राजी हो जाएंगे।
- उन्होंने कहा कि 2018 में राज्यसभा में मोदी सरकार का बहुमत हो जाएगा। इसके बाद जरूरी कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा।
RSS ने कहा- पुराना अनुभव कहता है कि बातचीत से हल निकलना मुश्किल
- एक दिन पहले तक आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट के सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का स्वागत कर रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बुधवार को अलग बयान दिया।
- अहमदाबाद में संघ के पश्चिम क्षेत्र के संघचालक डा़ॅ. जयंतिभाई भादेसिया ने कहा कि अदालत ने भले ही इस मामले को आस्था का मुद्दा बताते हुए आपसी बातचीत से हल निकालने का सुझाव दिया है, लेकिन पुराना अनुभव बताता है कि ऐसा होना मुश्किल है।
- उन्होंने कहा कि पहले बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी ने कहा था कि अगर इस तरह के सबूत मिल जाएं कि बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर था तो वे अपने आप इसे रामजन्मभूमि न्यास को सौंप देंगे। पर जब आर्कियोलॉजिकल सर्वे की खुदाई में ऐसी बात सामने आई तो वे अपनी बात से मुकर गए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि इस पर सभी संबंधित पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाएं। अगर इस मामले पर होने वाली बातचीत नाकाम रहती है तो हम दखल देंगे और इस मुद्दे का हल निकालने के लिए मीडिएटर अप्वाइंट करेंगे।
स्वामी ने क्या दिया था सुलह का फॉर्मूला?
- स्वामी ने ही इस मामले में जल्दी सुनवाई के लिए पिटीशन दायर की थी। उन्होंने कहा- हम हमेशा बातचीत को राजी थे। मंदिर और मस्जिद, दोनों बननी चाहिए। लेकिन मस्जिद सरयू नदी के पार बननी चाहिए। राम जन्मभूमि पूरी तरह तरह से राम मंदिर के लिए होनी चाहिए। हम भगवान राम का जन्मस्थान नहीं बदल सकते, लेकिन मस्जिद हम कहीं भी बना सकते हैं।
क्या है हाईकोर्ट का फॉर्मूला?
- 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था।
- निर्मोही अखाड़ा: विवादित जमीन का एक-तिहाई हिस्सा यानी राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह।
- रामलला विराजमान: एक-तिहाई हिस्सा यानी रामलला की मूर्ति वाली जगह।
- सुन्नी वक्फ बोर्ड: विवादित जमीन का बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा।
- इसी के खिलाफ पिटीशंस सुप्रीम कोर्ट में दायर हुईं।