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बैंको द्वारा खुली लूट, आपकी जेब काटने की तैयारी

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बैंकों द्वारा लगाया जाने वाला ट्रांजैक्शन टैक्स सरासर बेईमानी है
     जरा विचार कीजिए. बैंकों का व्यावसाय क्या है. जनता से विभिन्न जमा खातों में रुपया जमा करवा कर पूंजी बनाना इनमें बचत खातों में 4% और सावधि जमाओं में अधिकतम 7.5% ब्याज बैंक देता है, तथा चालू खातों की जमा राशि पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता.
     इसी राशि को बैंक कर्ज के रूप में, व्यापारियों को, उद्यमियों को, मकान बनाने के लिए, कार खरीदने के लिए, और अन्य प्रयोजन के लिए ऊंची ब्याज दरों पर लोन देतेे हैं.
     इस प्रकार बैंक जनता की ही जमा की गई रकम को उपयोग करके तगड़ा मुनाफा कमाते हैं
     अब प्रश्न ट्रांजैक्शन चार्ज का उठता है. जनता से अपने खाते से अपनी ही राशी निकालने पर किसी भी तरह का शुल्क लेना बेईमानी ही है. पहले बैंकों में बचत खातों सेे एक तिमाही में पच्चीस निकासी के ट्रांजैक्शन तक कोई शुल्क नहीं था, जो तर्कसंगत था. लेकिन अब दो ट्रंजैक्शन के बाद तीसरे ट्रंजैैक्शन स् बहुत ऊंची दर से शुल्क लगाया जाएगा और इस पर सर्विस टैक्स भी वसूला जाएगा. यह सरासर बेईमानी है.
      जमाकर्ता पर ट्रांजैक्शन चार्ज लगाने पर बैंक तर्क देते हैं कि एक ट्रांजैक्शन पर बैंक का बहुत खर्च आता है, लेकिन ये तो बैंकों का व्यवसाय है और प्रत्येक व्यवसाय में व्यावसायिक लागत तो आती ही है, उस लागत को ग्राहकों पर लाद देना कहां का औचित्य है. इस लागत को तो आप अपने मुनाफे में से वसुलिए.
     वस्तुतः बैंकों ने नोटबंदी के बाद सरकार द्वारा घर में नकद राशि रखने की सीमा निर्धारित करने के तथा एक दिन में अधिकतम पचास हजार की निकासी के निर्णय का फायदा उठाकर ये निर्णय लिया है. बैंक जानते हैं कि अब हर व्यक्ति अपनी राशि बैंक में जमा करने को बाध्य है. निकासी की सीमा भी निर्धारित होने के कारण जो व्यक्ति व्यवसाय करता है उसको महीने में कई बार पैसा निकालना पड़ेगा, जिसका लाभ बैंक भलजलूल ट्रांजैक्शन टैक्स लगाकर उठा रहे हैं.
      अब यह भी देखना जरूरी है कि वास्तव में ट्रांजैक्शन पर बैंकों.का कितना खर्च आता है. इसका आकलन बहुत आसान है, बैंकों के कुल ट्रांजैक्शन और कुल खर्च की गणना आज कंप्यूटर के युग में एक क्लिक में उपलब्ध हो जाती है. ट्रांजैक्शन की स्ख्या को कुल खर्च से भाग देने पर प्रति ट्रांजैक्शन लागत केवल कुछ पैसों में आएगी, और बैकों द्वारा प्रस्तावित चार्ज 150/रुपए प्रति ट्रांजैक्शन भी है. यह तो खुली लूट है.
     अतः जरूरी है कि बैंकों को यह खुली लूट करने से रोका जाए, और सरकार ऐसे किसी भी चार्ज पर रोक लगाए.

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