सन् 1968 के ऐक्ट के जरिए नियुक्त किए गए इस ऑफिस को 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद बची शत्रु संपत्तियों की रखवाली, प्रबंधन और प्रशासन की जिम्मेदारी दी गई थी। गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इस ऑफिस को अब इसके पास मौजूद संपत्तियों के निपटारे की ताकत मिल गई है। संसद के सिलेक्ट कमिटी की रिपोर्ट में उपलब्ध कराए गए डेटा से पता चलता है कि देश में पाकिस्तानी नागरिकों की 11,882 एकड़ में फैली 9,280 अचल संपत्तियां हैं।
यह तो एक उदाहरण है मित्रो की सरकार की नियत में खोट न हो तो ऐसे कई ऐतिहासिक मामले है जिसे निपटाने से हमारा देश कई गुना ज्यादा तरक्की कर सकता है, और इस पर मोदी सरकार सही साबित होती दिख रही है।
