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ठेले पर कोयला बेचा, मजदूरी की और आज चार सौ करोड़ की कंपनी की है मालकिन

Image result for starling ceramic pvt ltd    देश के दलित भाइयो को अहमदाबाद की दलित महिला उद्योगपति सविताबेन परमार से प्रेरणा लेनी चाहिए। जिन्होंने ठेले पर कोयला बेचा...मजदूरी की..और आज चार सौ करोड़ का टर्नओवर करने वाली स्टर्लिंग सिरेमिक्स लिमिटेड की मालकिन है। उनके पास ओडी, पजेरो, बीएमडब्ल्यू, मर्सीडीज जैसी लक्जरी कारो का काफिला है, और अहमदाबाद के पॉश एरिया में १० बेडरूम का विशाल बंगला है।
      सविताबेन परमार ने मेहनत करके अपने दम पर आज विशाल साम्राज्य खड़ा किया है। क्या कोई ये बता सकता है की यूपी बिहार, बंगाल आदि राज्यों में जहाँ कई दलित नेता अपने आपको दलितों का रहनुमा बताते है वहां कितने दलित उद्योगपति है?
       सविताबेन के पति देवजीभाई सिटी बस में कन्डक्टर थे। उन्हें बेहद मामूली सेलेरी मिलती थी, जिसमे गुजारा नही होता था। इसलिए मजबूरी में सविताबेन ने मिलों में से जला हुआ कोयला बिनकर उसे ठेले पर लेकर घर - घर बेचना शुरू किया। इसलिए उन्हें सब कोलसावाला [गुजराती में कोयला को कोलसा कहते है] कहने लगे। फिर उन्होंने कोयला की एक छोटी दूकान शुरू की। किस्मत ने भी उनका साथ दिया और एक सिरेमिक वाले ने उनसे अर्जेंसी में कोयला खरीदा। कोयला की डिलेवरी और पेमेंट लेने कई बार सविताबेन कारखाने में भी गयी और उन्होंने अपनी छोटी सी सिरेमिक भट्टी डाल दी। सिरेमिक की क्वालिटी अच्छी थी, धंधा चल निकला। फिर उन्होंने 1989 में प्रीमियर सिरेमिक्स और 1991 में स्टर्लिंग सिरेमिक्स लिमिटेड नामक कम्पनी बनाई और आज वह कई देशो में आज सिरेमिक्स प्रोड्क्स एक्सपोर्ट करती है।