रात्रि को सोते समय एक चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।
चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी(कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी। पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा। चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा।
‘‘फायदे’’
1. गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा।
2. हड्डियाँ मजबूत होगी।
3. आॅख का तेज बढ़ेगा।
4. बालों का विकास होगा।
5. पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।
6. शरीर में खुन दौड़ने लगेगा।
7. कफ से मुक्ति।
8. हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी।
9. थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।
10. स्मरण शक्ति बढ़ेगी।
11. स्त्री का शारीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा।
12. कान का बहरापन दूर होगा।
13. भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।
14. खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी।
15. शरीर की सभी खून की नलिकाएॅ शुद्ध हो जाएगी।
16. दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा।
17. नपुसंकता दूर होगी।
18. डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा। जिंदगी निरोग,आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्ययवर्धक बनेगी। जीवन जीने योग्य बनेगा।
कुछ लोग कलौंजी को काली जीरी समझ रहे है जो कि गल्त है काली जीरी अलग होती है जो आपको पंसारी/करियाणा की दुकान से मिल जाएगी जिसके नाम इस तरह से है
हिन्दी कालीजीरी, करजीरा।
संस्कृत अरण्यजीरक, कटुजीरक, बृहस्पाती।
मराठी कडूकारेलें, कडूजीरें।
गुजराती कडबुंजीरू, कालीजीरी।
बंगाली बनजीरा।
अंग्रेजी पर्पल फ्लीबेन।
लैटिन वर्नोनिया एन्थेलर्मिटिका (Vernonia Anthelmintica)
सावधानी:
ये दवा निमन लोगो के लिए वर्जित है:-
*जो महिलाए गर्भवती है या बच्चे को दूध पिलाती है
*बवासीर पाइल्स फ़िशल आदि के रोगी नही ले सकते
*लिवर या किड्नी के रोगी न ले
*ये दवा गर्म तासीर की है इसलिए अगर ये किसी को गर्मी करे तो इसका सेवन बंद कर दे और सर्दी में सेवन शुरू करे
