
नई दिल्ली।। एक ताजा शोध में पाया गया है कि अस्पताल में विशेषज्ञ
चिकित्सकों की कमी के कारण 10 में से चार अर्थात 40 प्रतिशत चिकित्सक हल्के
से लेकर गंभीर स्तर के तनाव के शिकार हैं। भारतीय क्रिटिकल केयर मेडिसन
जनरल में प्रकाशित एक अध्ययन में खुलासा किया गया है कि तनावमुक्त होने के
लिए 21 फीसदी डॉक्टर शराब, 18 प्रतिशत अवसाद रोधी दवा तथा 14 फीसदी
धूम्रपान का सेवन करते हैं। यदि आंकड़ा 700 क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों से
प्राप्त किया गया है। लेकिन 205 पुरुषों एवं 35 महिलाओं सहित 242 की
प्रतिक्रिया ली गई है।
प्रतिक्रिया देने वालों में अधिकांश 33
फीसदी एन स्थीसिया बेहोसी की विशेषता वाले थे। इसके अलावा 32 प्रतिशत
इंटरनल मेडिसिन, 7 फीसदी नाड़ी विशेषज्ञ एवं तीन प्रतिशत शिशु रोग विशेषज्ञ
तथा अन्य थे। अध्ययन के लेखक ने पाया क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ कई घंटों तक
काम करने, आई सी यू में अधिक मृत्यु दर तथा वीआईपी मरीजों की देखभाल को
लेकर जिम्मेदारी की वजह से तनाव ग्रस्त हैं।