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इस गांव में नहीं थी कोई सड़क और बुलेटवाली मुखिया ने बनवा दिया फोरलेन

     पटना।।आज के लोग सत्ता मिलते ही जनता से दूर हो जाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे जनप्रतिनिधि भी होते हैं जो पद को जिम्मेवारी समझ जी-जान से जनता की सेवा करते हैं।
      ऐसे ही लोगों में से एक सीतामढ़ी के सोनवर्षा प्रखंड के सिंघवाहिनी पंचायत की मुखिया रितु जायसवाल हैं। रितु चिलचिलाती धूप में भी लोगों से मिलने के लिए बुलेट लेकर निकल पड़ती हैं। उनके ससुराल में जाने के लिए पहले एक पगडंडी हुआ करती थी। आज वो वहां फोरलेन बनवा रही हैं।
   41 डिग्री टेम्परेचर में बी वो खुद वहां पहुंचकर रोड बनाने के काम का मुआयना करती हैं। इतना ही नहीं, वो रोड बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों पर भी कड़ी नजर रखती हैं। उनकी ईमानदारी और काम में सख्ती का नतीजा ही है कि आज ये सड़क तेजी से बन रही है।
    इस सड़क के साथ ही सिंघवाहिनी पंचायत की सूरत भी बदल जाएगी। रितू के काम करने के अंदाज ने उन्हें आज पूरे पंचायत के लोगों का हीरो बना दिया है। वो कहती हैं सालों पहले जब मैं ब्याह कर इस गांव में आई तो यहां की दुर्दशा देख चौंक गई। इस गांव में न तो सड़क थी, न बिजली और न ही पीने का पानी।
      गांव के लोगों की हालत बेहद खराब थी। ये सब देख उन्हें बहुत दुख हुआ और आखिरकार रितू ने दिल्ली के ऐश भरी जिंदगी को छोड़ गांव में रहने का फैसला किया। उनकी कोशिशों से इस पंचायत में पहली बार बिजली आई। लेकिन जब उन्होंने एक बुजुर्ग महिला को बिजली के बल्ब को फूंक मारकर बुझाते देखा तो इस वाकये ने उन्हें झकझोर दिया और
     उन्होंने यहां की सूरत बदलने का फैसला ले लिया। उन्होंने लोगों को वोट की कीमत समझाई और मुखिया का चुनाव लड़ा। लोगों ने उन्हें भारी बहुमत से जिताया। जीत मिलने के बाद वो और भी जोर-शोर से काम पर लग गईं। उन्होंने गांव में शौचालय बनवाया, पीने के पानी की व्यवस्था की, लड़कियों के लिए सिलाई-कटाई सेंटर चलवाया।
      ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। लेकिन कई और समस्यायें थी जिसका समाधान करना जरूरी था। ऐसी ही एक बड़ी समस्या सड़क थी। सड़क के नहीं होने से इस गांव में लोग शादियां नहीं करना चाहते थे। अगर किसी गर्भवती की हालत खराब हो जाती थी तो उसे अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पाता था।
     इन सारी समस्याओं के निपटारे के लिए रितू ने इसे बनवाने का फैसला लिया। हालांकि ये सब इतना आसान नहीं था। उन्होंने सबसे पहले प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना के डायरेक्टर जनरल श्री राजेश भूषण जी से संपर्क किया था, उन्हें अपनी तकलीफों से अवगत कराया, सुनवाई हुई और योजना स्वीकृत भी हुई, निविदा हुई और फिर कांट्रेक्टर को कॉन्ट्रैक्ट भी मिला। अब बारी गांववालों को समझाने की थी।
     दरअसल, जिस जमीन पर सड़क बनना था उस पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा था। रितू खुद गांव के एक-एक घर गईं और लोगों को सड़क बनने की अहमियत समझाई। उनके प्रयासों से गांववालों ने अतिक्रमण हटा लिया। कुछ लोगों ने अपनी मर्जी से जमीन भी दी। जिसके बाद जोर-शोर से रितू के निगरानी में सड़क बनवाने का काम शुरू हुआ।
       आखिरकार कुल 6,162 मीटर लंबी एवं 16 फ़ीट चौड़ी सड़क (12 फ़ीट 3.75 इंच के पिचिंग) बनना शुरू हो गया। इतनी लंबी सड़क में कई छोटी-छोटी पुलिया भी शामिल है। अब लगभग पिचिंग से पहले का काम समाप्ति पर है। इस सड़क के बन जाने से सिंघवाहिनी पंचायत के लोगों का विकास तो होगा ही।
     साथ ही पंचायत से निकलने में जहां 1.5 घंटे लगते थे अब वो समय घट कर 15 से 20 मिनट का हो जाएगा। रितू जायसवाल के इस प्रयास ने ये साबित कर दिया कि अगर कुछ करने की ललक हो तो कोई भी बाधा आपका रास्ता नहीं रोक सकती। आज के जनप्रतिनिधियों को उनसे सीख लेनी चाहिए। हम सबको रितू पर गर्व है।