अपने हक़ के लिए सरकार से दो-दो हाथ करने को तैयार किसान

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टीएसपी क्षैंत्र के लोगो के साथ हो रहां भेदभाव, अब होगी किसान हुकार रैली - पूर्व राज्य मंत्री दलीचन्द मईड़ा   
  बांसवाड़ा/राजस्थान।। भाजपा सरकार के देश की सत्ता पर काबीज होने से लेकर आज तक के कार्याकल पर यदि नजर डाले तो किसानों के शोषण की तस्वीर सी जहन में आ ही जाती है, औंर अगर बात राजस्थान के टीएसपी क्षैत्र की हो तो हालात बद से बदतर होते चले जातें है। इन सबके बीच यदि कोई व्यक्ति बीना किसी लालच, लोभ या बगैंर राजनैतिक स्वार्थ के टीएसपी क्षैंत्र के शोषित तबके के लिये सदैंव तैंयार रहें तो यह बात सोचने को भी मजबूर कर देती हैै।
    जी हां हम बात कर रहें है राजस्थान के पूर्व राज्य मंत्री दलीचन्द जी मईड़ा की जो टीएसपी क्षैंत्र के हर वर्ग के अधिकारों के लिये सदैव तत्पर रहते है। ऐसा ही कुछ करने का जज्बा लेकर आदिवासी किसान संघर्ष समिमि के बेनर तले मईड़ा ने बांसवाड़ा के एक निजी होटल में प्रेस वार्ता का आयोजन करते हुए कहां कि वर्तमान भाजपा सरकार ने जनजाति लोगो की मूलभूत सुविधाओं की उपेक्षा कर रहीं है। उन्होंने कहां कि टीएसपी के ग्रामीण क्षैत्रों में तो पिने के पानी तक का अभाव है।
    मईडा ने कहां कि पूर्व में माही बांध से 112 गांव प्रभावित हुए थे जिन्हें पेपर अलोटमेंट से सिर्फ भ्रमित किया गया जबकि विस्थापित हुए लोग आजतक दर- दर की ठोकरे खाने को मजबूर है औंर उनकी कही कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होने कहा जिले की सड़को के बदतर हालात हो चुके है, जिसकी वजह से आये दिन दुर्घटना घटती रहती है। वही सरकार ने वन विभाग की जमीन पर लोगो को पट्टे देकर भी गुमराह किया है, क्योंकि उक्त भूमि का पट्टाधारी किसी प्रकार के विशेष उपभोग एवं उपयोंग का अधिकारी हीे नहीं है। वहीं जिले के 40 प्रतिशत गांवों में बिजली ही उपलब्ध नहीं है, किसानों को भी मात्र 2 से 3 घण्टे ही बिजली दी जा रही है। वहीं किसानों को लेम्पस द्वारा मिलने वाली सुविधाएं भी लेम्पस व्यवस्थापकों एवं अधिकारीयों द्वारा उठा ली जाती है इसकी उच्च स्तरीय जांच व किसानांे का बकाया ऋण भी माफ करने की भी मईड़ा द्वारा मांग रखी गई।
माही विस्थापितों जैसा हाल नहीं होने देगे न्यूक्लियर पाॅवर प्लांट विस्थापितों का
    मईड़ा ने जिले में बनने वाले न्यूक्लियर पाॅवर प्लाण्ट को लेकर कहां की माही बांध एवं कडाणा बाँध के विस्थापितों का जो दयनिय हाल हुआ वैंसा इतिहास अब दौहराने नहीं दिया जायेगा। न्यूक्लियर पाॅवर प्लाण्ट में भी कई वर्ष बित जाने के बाद भी 80 प्रतिशत के लगभग लोगो को ही भूमि अधिग्रहण का मुआवजा दिया गया है। उन्होंने एनपीसीआईएल औंर सरकार को आगाह करते हुए कहां कि प्रत्येक यूवक को रोजगार एवं विस्थापितों के लिये काॅलोनी के अभाव में उक्त क्षैंत्र के ग्रामिण अपनी भूमि से विस्थापित नहीं होंगे। वहीं माही एवं कडाणा बांध के विस्थापितों के लिये मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने की भी सरकार के समक्ष उन्होंने मांग रखी।
थर्मल पावर प्लाण्ट के भूमि अधिग्रहण में विस्थापितों को ठग लिया गया    
    मईडा ने कहां कि फेफर थर्मल पाॅवर प्लाण्ट में अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के बदले विस्थापितों को मात्र 90 हजार रूपयें प्रति बिघा कर दर से और दानपुर के कासलाखाली, सालरापाड़ा एवं गोपालपुरी में अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के बदले विस्थापितों को मात्र 1 लाख 27 हजार रूपयें प्रति बिघा कर दर से मुआवजा दिया गया जो सरासर धोखा है जबकि उसी क्षैंत्र में लगने वाले न्यूक्लियर पाॅवर प्लांट के विस्थापितों को 8 लाख रूपये प्रति बिघा की दर से मुआवजा दिया गया है। इसलिये उक्त दोनों थर्मल पाॅवर प्लाण्ट के विस्थापितों के उचित मुआवजे के लिये भी आन्दोलन किया जावेंगा।
टीएसपी क्षैंत्र के लोगो के साथ हो रहां है भेदभाव, अब होगा किसान हुकार रैली का आयोजन
     उन्होंने टीएसपी क्षैंत्र के लोगो के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर कहां कि टीएसपी क्षैंत्र के बजट की 100 प्रतिशत राशि को क्षैत्र में समूह का गठन कर इसी क्षैत्र की मूलभूत सुविधाओं में खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीएसपी क्षैंत्र के 100 प्रतिशत बेरोगार यूवाओं को चाहे वह किसी भी जाति समाज का क्यों ना हो उसे सरकारी नौकरीयों में प्राथमिकता दी जावें। साथ ही जैंसा मेडिकल सेवाओं में 5 प्रतिशत टीएसपी क्षैंत्र के लोगो वरियता दी गई है, ठिक उसी प्रकार आईएएस एवं आईपीएस जैसी सेवाओं में भी 6 प्रतिशत टीएसपी क्षैंत्र के लोगो वरियता दी जाने की मांग रखी है। साथ ही मईड़ा ने टीएसपी क्षैंत्र के बेरोजगारों को 10 हजार रूपये बेरोजगारी भत्ता देने की मांग भी रखी। 
     उन्होंने टीएसपी क्षैंत्र के नाॅन कमाण्ड क्षैत्र में पानी की उपलब्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि माही का 40 टीएमसी पानी एवं नर्मदा बांध का पानी भी गुजरात को जा रहां है, जबकि क्षैंत्र के कई गांव सूखे की चपेट में है। उन्होंने कहां कि जिले में माहीडेम बनने से लेकर अबतक के छोटी सरवन, आबापूरा, कुशलगढ क्षैत्र के किसान माही के पानी से वंचित है इन क्षैत्रो में सिंचाई हेतु पानी पहुचाया जावें। मईडा ने अंचल में जहा माही का पानी की नहरों के क्षतिग्रस्त होने से खेतों में सिपेज की समस्या के निदान की भी मांग रखी गई इै। उन्होंने कहा कि माही की नहरे टेल तक पानी नहीं पहुंचा पा रही है अतः ऐसे प्रभावित गाँवो को भी नॉन कमांड घोषित किया जाकर उक्त क्षेत्र के निवासीयों को भी उसी अनुरूप सुविधाएँ मुहैया कराई जाए। मईडा ने कहां की इन सभी मांगों को लेकर 26 फरवरी 2018 को किसान हुकार रैली का आयोजन किया जावेंगा जिसमें सम्पूर्ण उदयपुर संभाग के किसानों द्वारा प्रदर्शन किया जावेंगा।  
   अच्छे दिन आ गये है या रास्ते में ही कही भटक गये है कुछ समझ में नहीं आ रहां है क्योंकि देश में जब हर जगह असन्तोंष हो तो कुछ यही विचार एक बार बरबस जहन में आ ही जाता है। राजस्थान राज्य में तो सूराज का संकल्प लेकर चलने वाली सरकार यदि किसानों, मजदुरो औंर बेरोजगार यूवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करे तो अच्छे दिनो  का उपहास लगना लाज़मी ही लगता है।

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