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जनता के साथ बजट में धोखा!....

    'जन-कल्याण' का डंका पीटने और जनता का सचमुच कल्याण करने में बड़ा फ़र्क है। पूरे देश को समझा दिया गया कि सरकार ने 1फरवरी, 2018 को पेश सालाना बजट के जरिए अपनी गरीब जनता के लिए 'विश्व की सबसे बड़ी जन स्वास्थ्य योजना' लागू करने का ऐलान कर दिया! विश्व में पहली बार! क्यूबा, वेनेजुएला और यूरोप के तमाम मुल्क ताकते रह गये! भारत में लागू हो रही है विश्व की अनोखी और बेमिसाल जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजना।
क्या है वह योजना? 
    घोषणा के मुताबिक देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों, यानी तकरीबन 50 करोड़ लोगों को नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम (NHPS) के तहत सरकार 5 लाख रूपए का कवर देगी। यह पूरी योजना बीमा-आधारित है। पिछली बार सरकार ने ठीक इसी तर्ज पर 1 लाख रूपए के कवर का ऐलान किया था। कितनों को वास्तविक लाभ मिला? प्रशासनिक स्तर पर माना जा चुका है कि उसका फायदा लक्ष्य के मुताबिक लोगों को नहीं मिल पाया। अपने जैसे देश में आम गरीबों को बीमा-आधारित स्वास्थ्य योजना का तब तक लाभ नहीं मिल सकता जब तक बड़े स्तर पर सरकारी चिकित्सालयों की व्यवस्था नहीं होती, बीमा योजना लागू करने में चुस्ती नहीं की जाती और फर्जीवाड़ा बंद नहीं होता।
     यह बीमा-आधारित स्वास्थ्य योजना सिर्फ लोगों को सुनाने और लुभाने का एक झुनझुना भर है। इस तरह की योजना का फायदा लोगों को पहले भी नहीं मिला। अब भी नहीं मिलेगा। भारत जैसे देश में सबके लिए स्वास्थ्य सुविधा का मतलब है कि सरकार पूरे देश में अस्पतालों और डाक्टरों की बड़े पैमाने पर व्यवस्था करे और लोगों को मुफ्त चिकित्सा या न्यूनतम फीस पर सारी सुविधा मिले जैसा दुनिया के कई देशों में संभव किया जा चुका है। पर इसके लिए सरकार को अपना स्वास्थ्य बजट कम से कम 7 फीसदी करना होगा। मौजूदा बीमा आधारित योजना अंततः बीमा कंपनियों और निजी अस्पतालों के मालिकों की पाकेट भरेगी। पर चुनाव प्रचार के दौरान यह झुनझुना खूब बजेगा!