गए थे बाज़ार टमाटर लेने और पहुँच गए कश्मीर आन्दोलन मे ..

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गए थे बाज़ार टमाटर लेने और पहुँच गए कश्मीर आन्दोलन मे ..

6 महीने बाद आये टमाटर
  कृष्णा नगर स्कूल (बैजनाथ) में नोकरी करते हुए अभी 10 दिन ही हुए थे कि स्वर्गीय श्री श्यामा प्रशाद के आवाहन पर कश्मीर आन्दोलन में भाग लेने घर से निकल पड़े! बड़ी बहन अस्वस्थ थी पठानकोट जाने का इरादे के वारे में घर वालो को कुछ नहीं बताया! बहन पुष्प ने कहा था कि टमाटर ले आना बिना कुछ कहे शांता कुमार अपने अन्य साथियों के साथ पठानकोट पहुच गए थे पठानकोट में आरएसएस के अन्य साथियों के साथ 19 वर्ष की आयु में पहलीबार गिरफ्तार हुए! शांता कुमार अपने साथियों सहित हिसार जेल पहुच गए! शांता कुमार अपने सभी साथियों में सबसे कम उम्र के कैदी थे हिसार की भयानक गर्मी और जेल का बातावरण युवा शांता कुमार के लिए कटु अनुभब था| जेलर अग्रेजो की भारतीयों के प्रति कटुता का पता पड़े हुए थे उन्होंने शांता कुमार से पूछा कि तुम्हारा नाम लिया है| 
     शांता कुमार ने कहा भारत और जाती शांताकुमार ने जबाब दिया हिन्दू जब जेल से छूटे तो कुछ पैसे घर तक ले जाने के लिए किराये के रूप में जेल अधिकारीयों ने दिए और पूछा तुम्हारा घर तो भारत है, तुम कहा जाओगे| उन दिनों चाय पीने की आदत खूब थी| शांता कुमार ने साथियों सहित इस पैसो की चाय उड़ाई और साथियों से पूछा कि यहाँ किसी आरएसएस कार्यकर्ता के घर का पता किया जाए| शांता कुमार और उन के अन्य साथी लुधियाना के कर्मठ कार्यकर्ता के घर पहुंचे| जिसने उनकी काँगड़ा पहुचने में मदद की| अभी घर पहुचे भी ना थे कि उन्हें याद आया की बहन पुष्पा ने टमाटर मंगवाए थे| अब 6 महीने के बाद किलो टमाटर ले कर क्या जाऊंगा| नोकरी की तलाश में दिल्ली पहुचे और रोजगार तलाश का संघर्ष शुरू हुआ| दिन में प्रचारक का काम और टूशन और शाम को आगे की पदाई| पूर्वी दिल्ली के एक स्कूल में अध्यापकका कार्य मिल गया और दिल्ली रहते हुए एल एल बी की पदाई की, संध्या कालीन कॉलेज में पूरी की! १९६४ में संतोष शेल्जा से विवाह हुआ| १९६७ में शांता कुमार वकालत के इरादे से पालमपुर आ | वकालत में मन नहीं लगा और साहित्य क्रांतिकरियो का, गीता और विवेकानंद का साहित्य पदने लगे| शांता कुमार की रूचि राजनीति में बदने लगी और प्रदेश की राजनीति में हिमाचल पूर्णउथान के बाद सक्रिय होने लगे|

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