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है न कमाल! बिहार में हरेक घंटे 5059 टॉयलेट यानी हर मिनट 84 टॉयलेट का निर्माण हुआ

     एक हफ़्ते में ज़्यादा से ज़्यादा कितने शौचालयों का निर्माण किया जा सकता है और वो भी जब पूरे हफ़्ते, चौबीसों घंटे, हर लम्हा काम चलता रहे तो.
   'चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के समापन समारोह' के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मोतीहारी में इसका जवाब दिया, 'आठ लाख पचास हज़ार टॉयलेट.'
    मोतीहारी में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "पिछले एक हफ्ते में बिहार में 8 लाख 50 हजार से ज़्यादा शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा हुआ है." थोड़ा ठहरिए! अब करिए हिसाब. हफ़्ते में सात दिन होते हैं. दिन में 24 घंटे यानी सात दिन में 168 घंटे हुए.
    प्रधानमंत्री के दावे पर यकीन किया जाए तो बिहार में हरेक घंटे 5059 टॉयलेट यानी हर मिनट 84 टॉयलेट का निर्माण हुआ. है न कमाल! लेकिन बिहार सरकार का कहना है कि इन साढ़े आठ लाख शौचालयों का निर्माण बीते एक सप्ताह नहीं बल्कि चार सप्ताह के दौरान हुआ है.
     बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के सीईओ सह मिशन डायरेक्टर बालामुरुगण डी ने बीबीसी को फोन पर बताया, "तेरह मार्च से लेकर नौ अप्रैल के बीच 8.50 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया."
     उनके मुताबिक बीते करीब डेढ़ बर्षों के दौरान की गई तैयारियों से ऐसा संभव हुआ. जिनमें राज-मिस्त्रियो की ट्रेनिंग से लेकर व्यापक जागरूकता अभियान शामिल है. बिहार में अभी क़रीब 86 लाख शौचालय हैं. वहीं अब भी आधे से भी कम करीब 43 फीसदी घरों में ही शौचालय उपलब्ध है. बिहार का कोई भी ज़िला अब तक खुले में शौच से मुक्त नहीं घोषित हुआ है. सरकार के दावों के मुताबिक रोहतास ज़िला बिहार का पहला ऐसा ज़िला बनने के क़रीब है.