
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के मुताबिक बीते पांच साल में भाजपा पार्टी ने महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों वाले सबसे ज्यादा लोगों को टिकट दिया है। महिलाओं के खिलाफ अपराध पर संवेदनशीलता बढ़ाने की तमाम कोशिशों के बावजूद राजनीतिक दल ऐसे मामलों का सामना कर रहे लोगों को टिकट देने से परहेज नहीं कर रहे हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) मुताबिक इस समय देश में 51 सांसद और विधायक ऐसे हैं, जिन पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के घोषित मामले हैं. इनमें शामिल 48 विधायकों और तीन सांसदों पर शील भंग, अपहरण, बलात्कार, महिला को विवाह के लिए मजबूर करना, महिला के साथ क्रूरता, वेश्यावृत्ति के लिए नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त और अश्लील इशारा करने जैसे आरोप हैं.एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा में सबसे ज्यादा 14 सांसद और विधायक हैं, जिन पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के घोषित मामले हैं. इसके बाद शिव सेना के सात और तृणमूल कांग्रेस के कुल छह सांसदों और विधायकों पर ऐसे मामले चल रहे हैं. एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच ने 4,896 चुनावी हलफनामों में से 4,852 का अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है. इनमें सांसदों के 774 और विधायकों के 4,078 हलफनामे शामिल हैं. इनमें 1,581 सांसदों और विधायकों ने अपने आपराधिक मामलों की, जबकि 51 सांसदों और विधायकों ने अपने खिलाफ महिलाओं से जुड़े आपराधिक मामलों की जानकारी दी है.
एडीआर के मुताबिक बीते पांच साल में महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामले वाले 334 लोगों को राजनीतिक दलों ने अलग-अलग चुनावों में टिकट दिया था. इनमें से 40 लोग लोकसभा या राज्यसभा के चुनाव में, जबकि 294 विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी थे. महिलाओं के खिलाफ अपराध के घोषित मामले वाले लोगों को टिकट देने में भाजपा सबसे आगे है. रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच साल में भाजपा ने ऐसे 48 लोगों को टिकट दिया है. वहीं, बसपा ने ऐसे 36 और कांग्रेस ने 27 लोगों को टिकट दिया है.
(ओमप्रकाश तिवारी)
