क्या दलित नेता अम्बेडकर का इस्तेमाल अपनी राजनीती चमकाने के लिए करते है ?

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   नमक खाकर नमक हरामी करने वाले को आप क्या कहेगें? महान राजा महाराज सयाजी गायकवाड, जिसने अम्बेडकर को पढ़ाया-लिखाया उसके बारे में हिन्दू विरोधी दलित नेता कभी नहीं बताते। आज के दलित नेता अम्बेडकर का इस्तेमाल सिर्फ अपनी राजनीती चमकाने के लिए करते है। और उनके जीवनी को गलत रूप से पेश करते है ताकि उनके दलित होने का फायदा उन्हें दलित वोट बैंक के रूप में मिले और वो हमेशा से दलितों को गुमराह करते रहे है, लेकिन अम्बेडकर के सफलता के पीछे की कहानी कुछ और ही है, जो की ये दलित नेता कभी किसी को नहीं बताते। 
      प्राप्त जानकारी के मुताबिक उन दिनों बड़ोदरा रियासत के महाराज सयाजी गायकवाड़ को एक चिठ्ठी मिली जिसमे लिखा था की मैं एक दलित हूँ और आगे की पढाई के लिए लंदन और अमेरिका जाना चाहता हूँ लेकिन मेरी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है की मैं अपने बल-बूते विदेशो में पढ़ने जा सकु और कोई भी मेरी मदद करने को तैयार नहीं है। ये चिठ्ठी कोई और नहीं स्वयं आंबेडकर ने लिखी थी। उस चिठ्ठी के साथ आंबेडकर ने अपनी मार्क शीट भी भेजा था जिसको देखकर सयाजी महाराज काफी प्रभावित हुए और अम्बेडकर को मिलने के लिए बुलाया और उनसे कहा तुम विदेश में पढाई करने जाओ और किसी बात की चिंता मत करना, महाराज ने अम्बेडकर की पढाई के सारे खर्चे उठाये और उनके विदेशो में रहने का भी प्रबंध किया। 
     जब भीम राव आंबेडकर पी एच डी करके भारत लौटे तो उन्हें कोई नौकरी नहीं दे रहा था तो ऐसे में एक बार फिर महाराज सयाजी ने उन्हें नौकरी दी और अपने रियासत में उन्हें महामंत्री के पद पर नियुक्त किया। महाराज ने उस जमाने में उन्हें 10,000 हजार महीने वेतन पर रखा जो आज के 1 करोड़ के बराबर है। लेकिन आज का दिन है, हैरानी तो तब होती है जब स्वयं घोषित दलित नेता उन्हें दबा-कुचला बताकर अपनी रोटिया सेकते है और दलितों को गुमराह करते है, ये तो छोडिए ये नेता कभी आंबेडकर का पूरा नाम तक नहीं बताते वो जानते है की एक बार सच्चाई सामने आ गयी तो सब बना बनाया खेल बिगड़ जायेगा।
 

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