मालवा के मॉडल संत के नाम से मशहूर भय्यूजी महाराज ने गोली मारकर की खुदकुशी

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मालवा के मॉडल संत के नाम से मशहूर भय्यूजी महाराज ने गोली मारकर की खुदकुशी

शिवराज सरकार ने बनाया था राज्य मंत्री
     मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मार ली. उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अभी तक घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है. घटना के फौरन बाद भय्यूजी को इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई. उन्होंने खुदकुशी क्यों कि इस बात की जांच की जा रही है. उनकी मौत से उनके भक्त और समर्थक गहरे सदमे में हैं. मध्य प्रदेश में भय्यूजी महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था. कुछ वक्त पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था. उनके अलावा 4 अन्य संत भी राज्यमंत्री बनाए गए थे.
       भय्यूजी महाराज का सुसाइड नोट सामने आया है, जिसमें अंग्रेजी में लिखा गया है, 'परिवार की देखभाल के लिए किसी को होना चाहिए। मैं जा रहा हूं, काफी तनावग्रस्त, परेशान था।' भय्यूजी के कई नेताओं से भी काफी नजदीकी संबंध थे। ऐसे में कई तरह की बातें उनकी मौत के बाद कही जा रही हैं। कांग्रेस के नेता मानक अग्रवाल ने भय्यूजी महाराज की खुदकुशी पर सवाल उठाए हैं और सीबीआई जांच की मांग की है । उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की सरकार का उन पर समर्थन देने और सुविधाओं को स्वीकार करने का दबाव था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। इसको लेकर वो परेशान थे।
     1968 को जन्मे भय्यूजी महाराज का असली नाम उदय सिंह देखमुख है. वह कपड़ों के एक ब्रांड के लिए कभी मॉडलिंग भी कर चुके हैं. भय्यू महाराज का देश के दिग्गज राजनेताओं से संपर्क थे. हालांकि वह शुजालपुर के जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे.
     वे विवाहित थे. उनकी एक बेटी है. और वे आम गृहस्थ की तरह इसी 2 मई को अपने पिताजी के निधन से पहले तक माता-पिता के साथ घर में रह रहे थे. उनकी मानें तो वे हर रोज कई सौ किमी की यात्रा करते हैं, ताकि जो सामाजिक कार्य वे कर रहे हैं, उन पर उनकी नजर रहे. वे फेसबुक, ट्विटर पर सक्रिय हैं औैर अपना ब्लॉग भी चलाते थे.
     भय्यू जी महाराज तब चर्चा में आए थे जब 2011 में अन्ना हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने उन्हें अपना दूत बनाकर भेजा था. इसी के बाद ही अन्ना ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था.
    वहीं पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे. उस उपवास को तुड़वाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज को आमंत्रित किया था. उनका सदगुरु दत्त धामिर्क ट्रस्ट नाम का ट्रस्ट भी चलता है. अपने ट्रस्ट के जरिए वह स्कॉलरशिप बांटते थे. कैदियों के बच्चों को पढ़ाते थे. और किसानों को खाद-बीज मुफ्त बांटते थे.
       इंदौर के अपने घर में भय्यूजी महाराज के खुद को गोली मारकर कथित खुदकुशी कर लेने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने इंदौर स्थित महाराज के घर पहुंचकर उनका पिस्टल, जिसे उन्होंने कथित तौर पर गोली मारी और सुसाइड नोट अपने कब्जे में ले लिया है। आईजी मरकंड देवोस्कर ने कहा है कि सुसाइड नोट और पिस्टल सीज कर दिया है और केस के हर पहलू पर गौर की जा रही है। उन्होंने कहा है कि परिवार के लोगों से भी मामले को लेकर पूछताछ की जाएगी।
     डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्रा ने कहा है कि सुसाइड नोट में महाराज ने मानसिक तनाव की बात कही है लेकिन वो किस बात को लेकर तनाव नें थे, इसका जिक्र नहीं किया है। मिश्रा ने कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी है, जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

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