घर में महंगी कार और एसी, फिर भी मुफ्त में चाहिए राशन

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घर में महंगी कार और एसी, फिर भी मुफ्त में चाहिए राशन

    गाजियाबाद।। कोरोना संकट में जहां एक तरफ मजदूर और रेहड़ी पटरी वाले राशन नहीं मिलने से परेशान हैं वहीं घर में महंगी कार और एसी होने के बावजूद कुछ लोग मुफ्त का राशन पाने के लिए राशन कार्ड बनवा रहे हैं। गोविन्दपुरम, कविनगर, शास्त्रीनगर, विजयनगर आदि जगह पर पार्षद और राशन डीलरों के पास आवेदन किए गए। राशन कार्ड बनने से पहले ही कई मामले पकड़ में आ गए। नगर निगम अब जांच के बाद ही आवेदन पत्र जिला आपूर्ति विभाग को भेज रहा है। 
    लॉकडाउन से बाजार, दुकान, फैक्टरी और रेस्टोरेंट आदि सभी बंद हैं। काम धंधा बंद होने से लोगों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। खासकर मजदूर वर्ग परेशान हैं। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। परेशानी को देखते हुए मजदूर, रेहड़ी पटरी वाले आदि का राशन कार्ड बनवाने के आदेश जारी हुए। शहरी क्षेत्र में राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन कराने का काम नगर निगम को दिया गया। नगर निगम मजदूरों के आवेदन पत्र लेने के बाद उन्हें जिला आपूर्ति विभाग को भेज रहा और वहीं से राशन कार्ड जारी किए जा रहे हैं। लेकिन मजदूरों के साथ-साथ अमीर लोग भी राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। इनमें वे लोग हैं जिनके घरों में महंगी गाड़ियां और एसी हैं। उनकी आमदनी अच्छी खासी है। इन लोगों ने पार्षद और राशन डीलर के पास राशन आवेदन किए। जिला आपूर्ति विभाग और नगर निगम की जांच में कई मामले पकड़ में आए हैं। जो आवेदन पकड़ में आए उन्हें रद्द कर दिया गया। 
    गोविन्दपुरम में रहने वाले पांच लोगों ने राशन कार्ड बनवाने के लिए पार्षद और राशन डीलर के पास आवेदन किया। गोविन्दपुरम के अलावा डीलर सदरपुर गांव में है। आवेदन करने वाले पात्र नहीं हैं। इन सभी के पास गाड़ियां और घरों में एसी है। इसके बाजवूद लोगों ने राशन कार्ड बनवाने के लिए आवेदन कर डाले। पार्षद पति सोहनवीर सिंह ने बताया कि इस तरह के आवेदन आए थे। निगम कर्मचारी ने जांच के बाद आवेदन रद्द कर दिए। 
   शास्त्रीनगर के रहने वाले कपिल शर्मा की परचून की दुकान है। उनके घर में एक गाड़ी और एसी है। इसके बावजूद राशन कार्ड के लिए आवेदन कर डाला। जांच के दौरान जिला आपूर्ति विभाग ने आवेदन गलत पाया, इसलिए उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया। 
   कविनगर में रहने वाले कुछ लोगों ने भी राशन कार्ड बनवाने के लिए पार्षद और डीलर के पास आवेदन किया। जांच के दौरान नगर निगम को पता चला कि आवेदनकर्ता अपात्र है, इसलिए उन सभी के आवेदन फॉर्म को निरस्त कर दिया गया। प्रशासन की ओर से जांच कर इनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

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