गांव को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए इस लड़की ने भोलेनाथ को जीभ काटकर चढ़ाई

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    बांदा/उत्तर प्रदेश।। कोरोना संक्रमण से खुद नहीं बल्कि अपने गांव को बचाने के लिए एक लड़की ने खुद की जान जोखिम में डाल दी | अन्धविश्वाश से ओतप्रोत इस लड़की ने जो कदम उठाया उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी | घटना के वक़्त पुजारी और कुछ लोग ही मंदिर में मौजूद थे | वे सभी रामायण का पाठ कर रहे थे | इस बीच भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा के सामने खड़े होकर पीड़ित लड़की पूजा पाठ में जुटी थी | उसने अपनी जीभ काटकर भगवान को चढ़ा दी | इसके बाद तेजी से हो रहे रक्तश्राव और दर्द से उसने चीखा | लेकिन उसकी आवाज़ लोगों को नहीं सुनाई दी | भगवान के सामने पीड़ित लड़की बेहोश गिरी पड़ी थी | 
   मंदिर में मौजूद पुजारी की निगाहें अचानक उस ओर गई और वे फ़ौरन दौड़ पड़े | उन्होंने मामले की सूचना अस्पताल को दी | मामला बांदा के बदौसा थाना क्षेत्र के भदावल गांव का है | उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से आये आस्था और अंधविश्वास से जुड़े इस मामले ने लोगों को हैरान कर दिया है | बताया जाता है कि कोरोना वायरस से गांव की रक्षा करने का संकल्प इस लड़की ने लिया था | पीड़ित लड़की की उम्र मात्र 16 साल बताई जा रही है | यह भी बताया जा रहा है कि लड़की ने अपनी जीभ काट कर शिव मंदिर में चढ़ाने की जानकारी अपनी कुछ सहेलियों को भी दी थी | लेकिन किसी ने उस पर विश्वास नहीं किया | 
    यह भी चर्चा है कि पीड़ित लड़की गांव की रक्षा के लिए खुद की बलि देने के लिए भी प्रयासरत थी | लेकिन गांव में किसी ने भी अंधविश्वास को लेकर उसे समझाने बुझाने का प्रयास नहीं किया | नतीजतन उसने गांव के शिव मंदिर में जाकर अपनी जीभ काटकर खुद को लहू लुहान कर लिया | पीड़ित लड़की को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर है | 
   फिलहाल डॉक्टरों ने उसे जरूरी इलाज और दवाएं दी हैं | होश में आने के बाद लड़की ने डॉक्टरों को बताया कि उसने कुछ दिन पहले कोरोना से गांव की रक्षा के लिए शिव भगवान से ऐसी मन्नत मांगी थी | लड़की ने बताया कि वह कई दिनों से कोरोना की डरावनी खबरें सुन रही थी, उसके मन में कई दिनों से यह बातें चल रही थीं | उसके मुताबिक ब्लेड की व्यवस्था कर वह बागै नदी के किनारे वाले शिव मंदिर में गई | 
    पूजा करने के बाद उसने अपनी जीभ काट ली | बताया जाता है कि गांव के ही स्कूल में यह लड़की कक्षा 10वी में पढ़ती है | उसके साथ पढ़ने वाली उसकी सहेली ने बताया कि वह कई दिनों से कह रही थी कि कोरोना से गांव को बचाने के लिए कुछ करना पड़ेगा, लेकिन उसने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया था | 
    उधर लड़की के माता पिता का कहना है कि घर में भी वह कोरोना महामारी को लेकर बाते करती और चिंतित रहती थी | उन्होंने बताया कि उसकी बातों या हरकतों से ऐसा नहीं लगा कि इतना बड़ा कदम उठा लेगी | इस मामले में बांदा के कलेक्टर अमित सिंह बंसल ने न्यूज़ टुडे को बताया कि पीड़ित लड़की ने अपनी आस्था की वजह से ऐसा किया है, उसे किसी ने इसके लिए मजबूर नहीं किया है | उन्होंने कहा कि उसे चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई गई है | उन्होंने कहा कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अगर जरूरत पड़ी तो उसकी काउंसिलिंग भी की जाएगी |

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