कंपनियों द्वारा ऑनलाइन "कैप्चा कोड" क्यों भरवाया जाता है?

Breaking News

10/recent/ticker-posts

Ad Code

कंपनियों द्वारा ऑनलाइन "कैप्चा कोड" क्यों भरवाया जाता है?

   कैप्चा या कैप्चा कोड डलवाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि एप्लीकेशन की स्क्रीन इस्तेमाल करने वाला रोबोट नहीं है बल्कि एक मानव है. अब इसे विस्तार से समझते हैं.
कैप्चा कोड भरने का प्रावधान क्यों किया जाता है?
   जब कोई भी एप्लीकेशन सार्वजनिक रूप से लोगों के लिए वेब पेज के रूप में उपलब्ध होता है तो यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल प्राधिकृत व्यक्ति ही एप्लीकेशन का उपयोग करें इसके लिए लॉगिन आईडीऔर पासवर्ड की व्यवस्था की जाती है. 
   इस पेज पर जब सही लॉगइन आईडी और पासवर्ड डाला जाता है तो अप्लीकेशन खुल जाता है किंतु गलत आईडी या गलत पासवर्ड डालने से एप्लीकेशन वेब पेज पर एक संदेश देता है कि आईडी या पासवर्ड गलत है.
  इसका मतलब यह हुआ कि जब वेब पेज पर लॉगइन आईडी और पासवर्ड डाला जाता है तो यह संदेश एप्लीकेशन सर्वर पर पहुंचता है और वहां पहले सुरक्षित आईडी में से यह चेक होता है कि आईडी सही है या नहीं और अगर आईडी सही है तो फिर पासवर्ड चेक होता है और तदनुसार या तो एप्लीकेशन खुलेगा या आपको संदेश आएगा कि आईडी और पासवर्ड गलत है. 
    आईडी और पासवर्ड गलत हो या सही, उपयोगकर्ता के कंप्यूटर से एप्लीकेशन सरवर तक डाटा जाता है और सरवर से आपके कंप्यूटर तक डाटा वापस आता है. इसमें बैंड विड्थ का उपयोग भी होता है, और एप्लीकेशन सर्वर का भी . प्रत्येक एप्लीकेशन सर्वर की एक अधिकतम सीमा होती है कि कितने उपयोगकर्ता प्रति सेकंड एक साथ लॉगिन कर सकते हैं. जब यह संख्या अधिकतम सीमा से अधिक हो जाती है तो एप्लीकेशन सरवर ठीक से काम नहीं करता है. सीमा से अधिक उपयोगकर्ताओं को एप्लीकेशन में प्रवेश नहीं मिलेगा और अगर बहुत ज्यादा लोग एक साथ कोशिश करेंगे तो एप्लीकेशन को भी नुकसान हो सकता है और एप्लीकेशन सर्वर को भी.
    आजकल साइबर क्रिमिनल और कुछ स्वार्थ प्रेरित संस्थान कुछ चुनिंदा वेब एप्लीकेशन को साजिश के तहत बंद कर देने या एप्लीकेशन और एप्लीकेशन सर्वर को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य रोबोटिक्स प्रोसेस द्वारा गलत आईडी और गलत पासवर्ड फीड करते हैं और डाटा भेजने की यह गति इतनी ज्यादा तेज होती है कि पूरी बैंडविड्थ इस्तेमाल हो जाती है और एप्लीकेशन सरवर काम करना बंद कर देता है.
   ऐसी अवस्था में इस एप्लीकेशन के जरूरतमंद उपभोक्ताओं को सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती है. इस समस्या को सूचना प्रौद्योगिकी की भाषा में डी डॉस या डिस्ट्रीब्यूटड डिनाइल ऑफ सर्विस कहा जाता है.
क्यों किया जाता है डी डॉस?
    साइबर क्रिमिनल का उद्देश्य पैसा कमाना होता है, और वह ऐसी गतिविधि चलाने के बाद संदेश भेज कर पैसे की मांग करते हैं. कभी-कभी दुश्मन देश या प्रतिद्वंदी कंपनी भी ऐसा करती है ताकि सेवा बाधित हो और संस्था और देश की बदनामी हो और वित्तीय नुकशान भी .
क्या है डी डॉस बचाव का साधन और यह कैसे काम करता है?
    वैसे तो बचाव के कई साधन है लेकिन उसमें कैप्चा फीड करवाना सबसे सस्ता और अच्छा साधन है. कैप्चर भरने में थोड़ा समय लगता है इसलिए एप्लीकेशन पर दो रिक्वेस्ट के बीच काफी अंतराल हो जाता है इसलिए एप्लीकेशन सर्वर को व्यस्त रखने या बैंडविथ को पूरी तरह से उपयोग करने की मंशा फलीभूत नहीं हो पाती है. कैप्चा को इस ढंग से डिजाइन किया जाता है कि उसे कोई भी रोबोटिक प्रोसेस पढ़कर फीड ना कर पाए. इसके लिए कैप्चा के अक्षरों को टेढ़ा मेढ़ा और धुंधला बनाते हैं. कई पहचाने गणित के साधन सूत्र भी इस्तेमाल करते हैं जैसे कुछ संख्याओं का योग घटाना गुणा और भाग करना और उसका उत्तर निकालना होता है. क्योंकि हर बार नया प्रश्न नए पैटर्न से आता है इसलिए रोबोटिक प्रोसेस से इसे रीड और फीड करना मुश्किल होता है. इसलिए सार्वजनिक उपयोग के एप्लीकेशंस में कैप्चा का इस्तेमाल करते हैं.
(अगर बिना कैप्चा भरे प्रयास किया जाएगा तो ऐसा सन्देश दिखाई पडेगा)
(अगर सही कैप्चा के साथ गलत यूजर आई डी और पासवर्ड डाला जाएगा तो यह सन्देश आयेगा)
कैप्चा कोड क्या होता है?
    यह अल्फा न्यूमैरिक, फोटो, गणितीय प्रश्न, या मानवीय गुण आधारित कुछ प्रश्न होते हैं जिन्हें या तो फीड करना होता है या जिनकी पहचान करनी होती है. सत्यता जांच के अलावा इनका एक उद्देश्य और होता है एप्लीकेशन में भेजे जाने वाली दो रिक्वेस्ट के बीच कुछ अंतराल बना देना ताकि एप्लीकेशन की उपलब्धता को बाधित ना किया जा सके.

Ad Code