क्या है ब्लैक फंगस..? जिसकी वजह से कई लोगो की जान चल गई..

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क्या है ब्लैक फंगस..? जिसकी वजह से कई लोगो की जान चल गई..

क्या मास्क में नमी के कारण फैल रहा है ब्लैक फंगस, 
एक्सपर्ट ने बताया मास्क पहनते समय बरतें क्या सावधानियां
     कोरोना मरीजों में ब्लैक फंगस (Black Fungus) के केस बढ़ने से देश का स्वास्थ्य महकमा काफी सतर्क हो गया है और आम लोगों को जागरूक करने में जुट गया है। इसी क्रम में देश के जाने-माने चिकित्सा विशेषज्ञों (Health Experts) ने ब्लैक फंगस के बारे में विस्तार से बताया है। डॉक्टरों ने बताया कि Black Fungus वातावरण में मौजूद है। खासकर मिट्टी में इसकी मौजूदगी ज्यादा होती है। यह स्वस्थ और मजबूत इम्यूनिटी वाले लोगों पर यह अटैक नहीं कर पाता है और जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है उन्हें यह अपना शिकार बनाता है।म्यूकोरमाइकोसिस में पहले लक्षण दर्द, नाक में भरापन, गालों पर सूजन, मुंह के अंदर फंगस का पैच और पलकों में सूजन है।
    देश में कोविड 19 के मरीजों में म्यूकोरमायकोसिस (ब्लैक फंगस) के मामलों में हो रही वृद्धि के पीछे मास्क में नमी का होना भी माना जा रहा है। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ एस एस लाल ने कहना है कि म्यूकोरमायसिस (ब्लैक फंगस) नामक इस रोग के होने के पीछे लंबी अवधि तक इस्तेमाल किया गया मास्क हो सकता है। मास्क पर जमा होने वाली गंदगी के कण से आंखों मे फंगस इन्फेक्शन होने की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा मास्क में नमी होने पर भी इस तरह का इन्फेक्शन हो सकता है। 
    डॉक्टर लाल ने बताया कि आईसीयू में भर्ती कोविड 19 के मरीज को लंबे समय तक इलाज के दौरान लगाए जाने वाले ऑक्सीजन के कारण भी यह फंगल इन्फेक्शन हो सकता है। उन्होंने बताया कि कोविड पेशन्ट को स्टेरॉयड की हाई डोज दी जाती है । जिसकी वजह से मरीज का शुगर लेवल बढने से इस तरह के संक्रमण के बढ़ने की अपार संभावना होती है।
   डॉक्टर लाल ने बताया कि फंगस के संक्रमण की शुरुआत नाक से होती है। नाक से ब्राउन या लाल कलर का म्यूकस जब बाहर निकलता है तो यह शुरुआती लक्षण ब्लैक फंगस का माना जाता है फिर यह धीरे धीरे आंखो मे पहुंच जाता है । नेत्रों में लालीपन, डिस्चार्ज होना, कंजंक्टिवाइटिस के लक्षण इस रोग में उभरते हैं। नेत्रों में भंयकर पीडा होती है और फिर विजन पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इस फंगस का असर नेत्रों के रेटिना पर पडता है फिर ब्रेन, नर्वस सिस्टम व ह्रदय तक हो जाने से मृत्यु तक हो जाती हैं।
   उन्होंने कहा कि मेडिकल कालेज में ब्लैक फंगस के इलाज के समुचित इंतजाम किए गये हैं। इलाज समय पर होने से रोगी को बचाया जा सकता है। जिला अस्पताल में ही कार्यरत नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर केशव स्वामी ने बताया कि फंगस वातावरण में पाया जाता है। बरसात के मौसम में ब्लैक फंगस फैलने की आशंका अधिक होती है। कोविड-19 से रिकवर हुए लोग प्रतिदिन मास्क को डेटॉल में धोकर धूप में सुखाकर ही पहने।
ब्लैक फंगस से बचाव के तरीके क्या है?
  1. शरीर और घर की सफाई पर विशेष ध्यान दें। 
  2. कपड़े के मास्क बाहर से आने पर तुरंत मास्क साबुन से धोएं, धूप में सुखाएं और प्रेस करें। 
  3. सर्जिकल मास्क एक दिन से ज्यादा इस्तेमाल न करें।
  4. अधिकांश सब्जियां खासकर प्याज़ छीलते समय दिखने वाली काली फंगस हाथों से होकर आंखों या मुंह मे चली जाती है इसलिए उसका बचाव करें। 
  5. साफ पानी, फिटकरी के पानी या सिरके से धोएं फिर इस्तेमाल करें।
  6. फ्रिज के दरवाजों और अंदर काली फंगस जमा हो जाती है खासकर रबर पर तो उसे तत्काल ब्रश साबुन से साफ करें और बाद में साबुन से हाथ भी धो लें।
  7. जब तक बहुत आवश्यक न हो, ऑक्सीजन लेवल सामान्य है तो अन्य दवाओं के साथ स्टेरॉयड न लें। जब तक आपका डॉक्टर सलाह नहीं दे। विशेष तौर पर यह शुगर वाले मरीजों के लिए अधिक खतरनाक है। 
  8. डॉक्टर की सलाह पर ही ऑक्सिजन लगायें, अपने आप अपनी मर्ज़ी से नहीं। 
  9. यदि मरीज को ऑक्सीजन लगी है तो नया मास्क और वह भी रोज साफ करके इस्तेमाल करें। 
  10. ऑक्सीजन सिलिंडर या concentrator में स्टेराइल वाटर/saline डालें और रोज बदलें।
  11. बारिश के मौसम में मरीज को या घर पर ठीक होकर आ जाएं तब भी किसी भी नम जगह बिस्तर या नम कमरे में नहीं रहना है। 
  12. अस्पताल की तरह रोज बिस्तर की चादर और तकिए के कवर बदलना है और बाथरूम को नियमित साफ रखना है।
  13. रूमाल गमछा तौलिया रोज धोना है।
  14. दोनो कान में सरसों का तेल (2-3 बूंद) हर दूसरे दिन डाले। 
  15. रोजाना एक बार भाप लें और उसके 30 मिनट बाद 1-1 बून्द सरसो का तेल दोनो नाक में डालें। 
  16. फिटकरी व सेंधा नमक के गुनगुने पानी से दिन में 2 बार अच्छे से कुल्ला करें। 

(डॉ सुधीर श्रीवास्तव)
वैज्ञानिक-औषधि रसायन
प्राकृतिक चिकित्सा सलाहकार

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