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अमेरिका में माता-पिता की संपत्ति का क्या होता है?

अमेरिका में माता-पिता की संपत्ति का क्या होता है, जब बच्चे 18 साल होने के बाद घर छोड़कर चले जाते हैं?
    अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक माता-पिता अपने 30 साल के बेरोजगार बेटे को लेकर कोर्ट चले गए, ये कहते हुए कि उनका बेटा घर के कामों में कोई मदद नहीं करता है और न ही वो घर पर रहने का किराया देता है. पिछले कई महीनों में बेटे को लिखित में 5 नोटिस भी दिए गए कि वो घर छोड़कर चला जाए, लेकिन बेटा नहीं गया लिहाजा अब कोर्ट ने बेटे को तुरंत घर छोड़कर चले जाने का आदेश दिया है.
माता पिता ने कोर्ट का सहारा लेकर अपने बेटे को घर से बाहर का रास्ता क्यों दिखाया
    माता-पिता ने बेटे को कई बार नौकरी करने की सलाह दी, उससे उम्मीद की थी कि नौकरी नहीं कर रहा तो कम से कम घर के ही कामों में मां का हाथ बटा दे, लेकिन वो कुछ भी नहीं करता था और घर में पड़े-पड़े सिर्फ अपना समय खराब कर रहा था. लिहाजा मां-बाप को ये कदम उठाना पड़ा.
    अब ऐसे मां-बाप के बारे में जानकर किसी को भी गुस्सा आ सकता है. भला कौन करता है ऐसा, कौन अपने बच्चों से घर में रहने का किराया मांगता है. भारतीय परिवेश में देखें तो ये वाकई अनैतिक लगता है, लेकिन यहां बात भारत की नहीं अमेरिका की है. और अमरीका की संस्कृति हमारी संस्कृति से बिलकुल अलग है. लेकिन फिर भी इस वाकिए ने हमारे समाज के सामने एक बड़ी बहस खड़ी कर दी है, जिसपर विचार होना ही चाहिए.
अमेरिकी संस्कृति भारत से अलग लेकिन देती है सीख 
   पक्षी एक वक्त तक ही अपने बच्चों के मुंह में दाना डालते हैं, और जब बच्चों के पंख उन्हें उड़ने की मजबूती दे देते हैं तो उन्हें अपनी मां का घोंसला छोड़ना होता है. फिर वो आजाद हो जाते हैं और अपनी लड़ाई खुद लड़ते हैं. अमेरिका की संस्कृति भी ठीक ऐसी ही है जैसे प्रकृति की होती है. वहां भी बच्चों का लालन पालन में मां-बाप कोई कमी नहीं छोड़ते, पढ़ाते लिखाते हैं लेकिन वयस्क होते है बच्चे अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रयास करने लगते हैं कि जिंदगी में लायक बन सकें.
कोई भी काम छोटा बड़ा नहीं होता
    संयुक्त परिवार जैसी कोई चीज वहां नहीं होती. इसलिए हर किसी को अपने लिए मेहनत खुद ही करनी होती है. वहां उच्च शिक्षा के लिए बच्चे खुद ही लोन लेते हैं और पढ़ते हैं. जो नहीं पढ़ते वो भी अपने पैरों पर जल्द से जल्द खड़ा होना चाहते हैं, फिर चाहे कोई भी काम उन्हें करना पड़े. ध्येय सिर्फ एक ही कि खुद के खर्चे खुद उठाने हैं. माता-पिता नहीं चाहते कि बच्चे उनसे दूर हों, बस उनका मकसद सिर्फ यही होता है कि वो संवतंत्र या इंडिपेंडेट हो जाएं. फिर चाहे वो उनके साथ रहें या फिर अलग.

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