एक वीर राजपूत जिसने शाहजहां के दरबार में ही उसके सिपहसालार की गर्दन उड़ा दी

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एक वीर राजपूत जिसने शाहजहां के दरबार में ही उसके सिपहसालार की गर्दन उड़ा दी

Amar Singh Rathore
    बात जब हिंदुस्तान के वीरों की हो तो सबसे पहले राजस्थान के वीरों का नाम आता है। आप में से कई लोग इतिहास की इस सत्य घटना से शायद अभी तक अनजान हो। यहाँ हम बात राजस्थान के ही एक वीर राजपूत राजा की कर रहे है जिसने क्रोधित होकर शाहजहां के दरबार में ही उसके सिपहसालार सलावत खान का गला काट दिया था।
   बता दे की अमर सिंह राठौड़ जो मारवाड़ के राज परिवार से थे और परिवार से नाराजगी के चलते वो मुगल दरबार में चला गया थे। उस समय शाहजहां का शासन था दिल्ली पर, अमर सिंह राठौड़ बहुत ही बहादुर और साहसी योद्धा थे जिसके वजह से उसे शाहजहां ने नागौर की मनसबदारी दी थी।
Amar Singh Rathore
क्या हुआ था विवाद?
    असल में अमर सिंह का दरबार में मान सम्मान था जिससे मुस्लिम दरबारी खासे खुश नहीं थे। एक दिन अमर सिंह शिकार खेलने गए तो शाहजहां इससे तुनक उठा कि वो उससे बिना इजाजत लिए ही शिकार पर कैसे चले गए है, तो उसने अमर सिंह पर इसके लिए हर्जाना ओर टैक्स लगा दिया गया साथ ही उन्हें शाहजहां ने अपने दरबार में बुलाया
    जब अमर सिंह से इसका कारण पूछा गया और टैक्स के लिए कहा गया तो उसने कहा कि "वो किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है और उसकी संपति सिर्फ़ उसकी तलवार है, जिसे भी हर्जाना चाहिए उसकी तलवार से वसूल कर ले।"
मुग़ल की गर्दन काट, किले से घोड़े सहित छलांग लगा दी
    तभी एक दरबारी सलावत खान ने कहा कि "क्या जाहिल जैसी बात करते हो रावजी" और इसी बात पर अमर सिंह को गुस्सा आ गया और उसने वहीं शाहजहां के आगे ही आव देखा ना ताव सालावत खान को मौत के घाट उतार दिया और दरबार में मौजूद सैनिकों से लड़ते हुए आगरा के किले से अपने घोड़े "बहादुर" सहित छलांग लगा दी, जिसमें बहादुर ने दम तोड़ दिया आपको बता दे कि आगरा किले के बाहर ही "बहादुर" नामक घोड़े की छतरी अभी भी है।
Amar Singh Rathore
मुगलों ने दिखाई अपनी औकात, धोखे से मारा अमर सिंह को
    बाद में संधि के लिए अर्जुन सिंह उसके बहनोई के कहने पर अमर सिंह वापस जब किले में आया तो उसे धोखे से मार दिया गया और शाहजहां ने उसकी लाश को एक ऊंचे बुर्ज पर रखवा दिया और राजपूतों को चैलेंज दिया कि उसकी लाश को वहा आकर उसे ले जाकर दिखाएं।
राठौड़ों ने किले पर कर दी चढाई
    इसी चुनौती को बल्लू चंपावत जो अमर सिंह का दोस्त था ने कबूल किया और 50 राठौड़ योद्धाओं के साथ लाश लेने के लिए आगरा के किले पर चढ़ गए और वहां सैनिकों को मारते हुऐ और खुद घायल होते हुए लाश को ले गए लेकिन उसके बाद घायल होने से उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
आज भी मौके पर सत्यता के प्रतिक है मौजूद 
    आगरा किले में एक अमर सिंह गेट है जहां ये युद्ध हुआ उसका वो आज भी सत्यता का प्रतीक है। यह प्रतिक राजपूत योद्धाओं की बहादुरी बताता है कि कैसे वो झुके नहीं और अपनी आन-बान के लिए बलिदान दिया और मुगल शासक को उसी के किले में शर्मिंदा होने को मजबूर कर दिया। आपको बता दे कि अमर सिंह राठौड़ की बहादुरी के गीत आज भी राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब में कई उत्सवों पर गाए जाते हैं।

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