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दुःख की घड़ी में सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दें - रामदासजी महाराज

  बांसवाड़ा/राजस्थान।। लालीवाव मठ में श्री रामकृष्ण सत्संग मण्डल के तत्वावधान व महामण्डलेश्वर हरिओमदास जी महाराज के पावन सान्निध्य में चल रहे पंच दिवसीय नानी बाई रो मायरो कथा में कथा व्यास महंत श्री रामदासजी महाराज ने कहा कि जीवन में जब परिस्थितियों बस के बाहार हो जाएं तो सब कुछ उस परमपिता पर छोड़ देना चाहिए। कई बार हम समस्या आने पर तनाव व अवसाद से घिर जाते हैं। ऐसे में हमें धैर्य से काम लेना चाहिए। बड़े-बड़े दुःखों की बस एक दवा है वो है समय। समय के साथ सभी दुःख मिट जाते हैं।
नानी बाई का मायरा में संत नरसी की कथा के सुनाए गए प्रसंग:-
राधा-कृष्ण के प्रेम में झूमे नानी भक्त
  लालीवाव मठ में नानी बाई का मायरा कथा में भक्तों ने खूब आनन्द लिया। निमच से आए महंत श्री रामदासजी महाराज ने नानी बाई की कथा मेवाड़ी भाषा में सुनाई और एक से बढ़कर एक भजन सुनाए। संगीतमयी कथा के दौरान नानी व श्री राधे-राधे के जयकारों से पूरा भजलेराम हनुमान टेकरी परिसर गूंजता रहा। नीमच से आए महंत रामदासजी महाराज ने संत नरसी की कथा सुनाई। उन्होने बताया कि नरसी ने मायरे (भात) के लिए किस तरह अंजार जाने की तैयारी की थी। रास्ते में उनकी बैलगाड़ी टूट जाने पर कैसे भगवान श्री कृष्ण ने उनकी मदद की थी। नानी बाई द्वारा सरोवर पर प्राण त्यागने के बहाने जाना एवं श्री कृष्ण-रुकमणि और राधा द्वारा मायरा भरने की भक्तिमय कथा का उन्होने विस्तार से वर्णन किया।
 इस मौके पर बावल, नीमच से आए सुनील रंगा कलाकार ने कथा के बीच-बीच में संबंधित प्रसंगों पर नृत्य नाटिका झांकी का मंचन किया।
 श्री रामकृष्ण सत्संग मण्डल द्वारा आयोजित भव्य नानी बाई रो मायरो कथा का आयोजन कर भजलेराम हनुमान टेकरी लालीवाव मठ को भक्तिमय कर दिया। लालीवाव मठ में नानी बाई रो मायरो कथा का आयोजन 10 से 13 जनवरी तक दोपहर 1.30 से 5 बजे तक किया जाएगा। व्यासपीठ पर विराजमान महंत श्री रामदासजी महाराजजी ने अपनी सुमधुर वाणी से कथा प्रसंगों के बीच भजनों से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। पंचदिवसीय नानी बाई रो मायरों कथा में संत नरसी मेहता की कथा को जानेंगे। 
  कथा के माध्यम से सामाजिक परिस्थितियों पर कटाक्ष करते हुए रामदासजी महाराजजी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में सहनशीलता की कमी है, कोई खामोश नहीं होना चाहता, विवाह में सास-बहू में कोई एक मौन धारण कर ले तो, परिवार संवर जा सकता है। सत्संग में आकर कोई अच्छी बात नहीं सिखे तो सत्संग का लाभ लेने से चुकना नहीं चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि जीवन में अहंकार से दूर रह कर ही भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ा जा सकता है।
 कथा के पूर्व कथा के मुख्य यजमान महेशजी पालीवाव के निवास स्थान कल्याण कॉलोनी से भजले राम हनुमान टेकरी तक ढ़ोल, नगारो शौभायात्रा निकाली गई। जिसमें श्रद्धालुओं ने जमकर आनन्द लिया।
मठ में पं. समरत मेहता एवं पं. संदीप के आचार्यत्व में महंत गुरुपादुका पूजन से श्रीगणेश किया
 इस दौरान प्रातःकाल लालीवाव पीठाधीश्वर महंतश्री हरिओमदास महाराज के सान्निध्य में महंत नारायणदासजी महाराज की 20वीं पुण्यतिथी के उपलक्ष में उनकी छत्री पर गुरुपादुका पूजन एवं पुष्पार्चन अभिषेक किया गया।सोमवार को ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव महंतश्री नारायणदासजी महाराज की छत्री पर गुरु अर्चना मंत्रों एवं स्तवन के साथ गुरु पादुका महापूजा पूर्ण भक्तिभाव से की गई तथा आरती एवं महाप्रसादी का आयोजन हुआ। महोत्सव के पहले दिन सायंकालीन सत्र में महारुद्राभिषेक श्री स्वामी रामानंद सरस्वती वेद पाठशाला एवं प्रदोष मण्डल द्वारा रुद्राभिषेक अनुष्ठान किया गया।
बिन हरि भजन न जाये कलेसा...सत्संग के बिना जीवन अधूरा.....रामदासजी महाराज
 केलूखेड़ा नीमच मध्यप्रदेश के रामदासजी महाराज द्वारा नानी बाई का मायरा के अन्तर्गत काव्यात्मक अभिव्यक्ति के बीच प्रेरणास्पद प्रस्तुतियां दी बिन हरि भजन न जाये कलेसा. जो करते रहेंगे भजन धीरे-धीरे, तो मिल जायेंगे प्रभु धीरे-धीरे...., मीठे रस से भर्यो रे राधा रानी लागे .... अगर प्रभु से मिलने की है दिल में तमन्ना करो शुद्ध अन्तःकरण धीरे-धीरे...,’’ इन प्रस्तुतियों के साथ मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने अहंकार, मद और दम्भ को समाप्त कर जीवन को कुन्दन बनाने के अनेक सूत्र देते हुए अपने परिवार घर और समाज को गलत मार्ग से सही दिशा में लाने की युक्तियां बताई। उन्होने कहा कि हमारे मन का होता है तो आगे नुकसान संभव है परन्तु प्रभु के मन का होने से जीव का कल्याण सुनिश्चित है। उन्होनें कहा कि सुख-दुःख में रोना कायरता है। संशय और विश्वास एक साथ यात्रा नहीं कर सकते। ऐसे में मंत्र, सन्त और भगवन्त की परीक्षा का दुष्परिणाम सभी को भोगना पड़ता है। इसलिए उन्होने बताया कि जहां विश्वास है वहीं ईश्वर का वास है।
धर्मशास्त्र के साथ निकली पोथी शोभायात्रा
  व्यासपीठ पर कथा के दौरान पारम्परिक वाद्य यंत्रों की थाप पर भक्ति संगीत की सुर सरिता गंधर्व कुमारों के मुखारविंदों से निकल रही थी तो धर्म सभा में मौजूद श्रद्धालुजन करतल ध्वनियों के बीच कीर्तन में अपनी सहभागिता अदा करने स्वयं को रोक नहीं पा रहे थे।
  कथा से पूर्व श्री रामकृष्ण सत्संग मण्डल, लालीवाव मठ के शिष्य मण्डल के तत्वावधान में मुख्य यजमान महेश पालीवाल के निवास से सिंगवाव, रामद्वारा होते हुए कथास्थल भजलेराम हनुमान मन्दिर तक धर्मशास्त्र की पोथी लिए शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें मुख्य यजमान धर्मशास्त्र अपने मस्तक पर धारण कर चल रहे थे वहीं बेण्ड बाजों धार्मिक जयघोष और मंगलगान के साथ यह शोभायात्रा कथास्थल पहुंचकर धर्मसभा में तब्दील हो गई।
  कथास्थल पर व्यासपीठ का सम्मान महेश पालीवाल एवं उनके परिवारजनों में अनिल पालीवाल, आनन्छ पालीवाल, राजेन्द्र पालीवाल, नितेश पालीवाल, अशोक पालीवाल, राधेश्याम पालीवाल, संजय पालीवाल ने किया। तदुपरान्त श्री रामकृष्ण सत्संग मण्डल के सदस्यों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
इनका हुआ सम्मान
  संतों में लालीवाव मठ के मठाधीश्वर हरिओमदासजी, मोहनदासजी महाराज, सीतारामजी महाराज, पं.समरथजी, पं. सदीपजी, गंन्धर्वो में भजन गायक हितेश, हारमोनियम पर मांगीलाल जी, कीपेड पर सुनीलजी ढोलक पर जितेन्द्रजी, ऑक्टोपेड पर अंतिमजी, लाभार्थियों में मानस मण्डल के अध्यक्ष महेश पंचाल, महामंत्री अमृतलाल पंचाल, रूद्राभिषेक के यजमान रामचन्द्र जी तेली, वीरेन्द्र जी दोसी, अरूणजी दोसी, ईश्वरदासजी वैष्णव, दुर्गावाहिनी की साक्षी दक का सम्मान किया गया।
  जानकारी देते हुए प्रवक्ता हितेश वैष्णव ने बताया कि आज शाम भजलेराम हनुमान मन्दिर परिसर में काव्यगोष्ठी का आयोजन होगा। संचालन नन्दकिशोर वैष्णव ने किया।

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