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क्या आप जानते हैं भारत में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति राज्यपाल से भी ज्यादा प्रोटोकॉल जजों को हासिल है। केंद्र सरकार या राज्य सरकार इन्हें सस्पेंड या बर्खास्त नहीं कर सकती, उनके घर पुलिस सीबीआई ईडी बगैर चीफ जस्टिस के इजाजत के नहीं जा सकती।
यह कितने भी भ्रष्ट हो इनकी निगरानी नहीं की जा सकती उनके फोन या तमाम गजट को सर्वेलेंस पर नहीं रखा जा सकता। इसीलिए भारत का हर एक जज खुलकर भ्रष्टाचार करता है घर में नोटों की बोरे भर भरकर रखता है और कभी पकड़ में नहीं आता।
जस्टिस वर्मा भी पकड में नहीं आते अगर उनके घर पर आग नहीं लगी होती और एक ईमानदार फायर कर्मचारी ने वीडियो नहीं बनाया होता। सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत क्लीन चिट दे दिया की अफवाह फैलाई जा रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने तुरंत क्लीन चिट दे दिया कि अफवाह फैलाई जा रही है।
टीवी चैनलों पर वी के मनन अभिषेक मनु सिंघवी जैसे बड़े-बड़े वकील कह रहे थे आग तो जनरेटर में लगी थी अंदर कोई गया ही नहीं था तो नोट मिलने का सवाल कैसे उठाता। तरह-तरह की थ्योरी दी जा रही थी।
मगर यह लोग भूल गए की आग बुझाने वाले ने यह सोचकर वीडियो बना लिया कि यह एक जज का घर है जो भारत में राष्ट्रपति से भी ऊंचा है बगैर सुबुत के इसके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं होगी इसीलिए उसने वीडियो बना लिया।
लेकिन जस्टिस वर्मा इतना घाघ है अब नई थ्योरी देकर कह रहा है कि स्टोर रूम तो मेरे कब्जे में था ही नहीं। आपको बता दे कि यह वही जज है जिसने हेमंत सोरेन के खिलाफ सीबीआई जांच रोकने के आदेश दिए थे। यह वही जज है जिसने दिल्ली दंगों के 11 दंगाइयों को पर्याप्त सबूत होने के बावजूद रिहा करने का आदेश दिया था जबकि निचली अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा दिया था।
आप लोग क्या समझते हैं यह सारे फैसले जस्टिस वर्मा ने यूं ही दिए होंगे ?

